फावड़ा, संकल्प और सवाल—गोमती पुनर्जीवन अभियान की असली परीक्षा अब

फावड़ा, संकल्प और सवाल—गोमती पुनर्जीवन अभियान की असली परीक्षा अब
जनप्रतिनिधियों और अफसरों ने गोमती को जिंदा करने को शुरु की पहल
पीलीभीत। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी “वन डिस्ट्रिक्ट वन रिवर” योजना के तहत बुधवार को पूरनपुर विधानसभा क्षेत्र स्थित पवित्र गोमती नदी के उद्गम स्थल माधोटांडा में व्यापक सफाई एवं पुनर्जीवन अभियान की शुरुआत की गई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में चल रही इस योजना का उद्देश्य नदियों को पुनर्जीवित करना, उनके अस्तित्व को बचाना और जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम की शुरुआत विधि-विधान से हवन-पूजन के साथ हुई, जिसमें मुख्य अतिथि विधायक बाबूराम पासवान ने भाग लिया। उन्होंने स्वयं फावड़ा चलाकर श्रमदान किया और अभियान का शुभारंभ किया। इस दौरान उद्गम स्थल पर जमा गंदगी को हटाया गया और आसपास के क्षेत्र की साफ-सफाई के लिए जनसहभागिता के साथ व्यापक कार्य किया गया।अपने संबोधन में विधायक ने कहा कि नदियां केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और आस्था का आधार हैं। यदि समय रहते उनका संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे नदियों को प्रदूषित होने से बचाएं और स्वच्छता को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।कार्यक्रम में सीडीओ राजेंद्र कुमार श्रीवास, उपजिलाधिकारी प्रमेश कुमार, खंड विकास अधिकारी हेमंत कुमार यादव सहित अन्य अधिकारियों ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत नदियों की नियमित सफाई, तटों का संरक्षण और जलस्तर बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, ग्रामीणों और स्वयंसेवी संगठनों को जोड़कर इसे जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है।गौरतलब है कि वर्षों से उपेक्षा, अतिक्रमण और गाद जमाव के चलते गोमती नदी कई स्थानों पर अपना अस्तित्व खो चुकी है। हालांकि, इससे पहले भी नदी को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए गए थे, लेकिन वे स्थायी रूप से सफल नहीं हो सके। ऐसे में इस बार शुरू हुए अभियान को लेकर लोगों में जहां नई उम्मीद जगी है, वहीं इसके स्थायित्व को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।प्रशासन की योजना के अनुसार करीब 47 किलोमीटर तक नदी की खोदाई, सफाई, गहरीकरण और चौड़ीकरण किया जाएगा, जिससे बरसात के पानी का बेहतर संचयन हो सके और सालभर जल प्रवाह बना रहे। इससे क्षेत्र के भूजल स्तर में सुधार होने की भी उम्मीद जताई जा रही है।अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, युवाओं और गोमती भक्तों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। “नदी बचाओ, जीवन बचाओ” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। लोगों ने श्रमदान कर गोमती को स्वच्छ और अविरल बनाने का संकल्प लिया।यह पहल जहां एक ओर स्वच्छता और जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, वहीं दूसरी ओर लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि यह अभियान निरंतर चलता है या फिर पूर्व प्रयासों की तरह कुछ समय बाद ठंडे बस्ते में चला जाता है।




