लगन, संघर्ष और जीत: सुधीर सिंह की सफलता ने बढ़ाया जिले का मान”
पूरनपुर, पीलीभीत।मेहनत की हर बूंद जब किस्मत से मिल जाती है, तब जाकर किसी गांव की मिट्टी भी सोना बन जाती है।कुछ ऐसी ही कहानी लिखी है पूरनपुर तहसील के गांव गुलड़िया भूप सिंह निवासी अमर सिंह (एडवोकेट) के बेटे सुधीर सिंह ने। जिन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा में 77वीं रैंक हासिल कर उन्होंने अपने परिवार ही नहीं, पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।पूरनपुर तहसील क्षेत्र के गांव गुलड़िया भूप सिंह निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता अमर सिंह के पुत्र सुधीर सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की प्रतिष्ठित परीक्षा में 77वीं रैंक हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उनकी इस उल्लेखनीय उपलब्धि से गांव सहित पूरे पूरनपुर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई है।बताया जा रहा है कि सुधीर सिंह शुरू से ही मेधावी छात्र रहे हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव और आसपास के विद्यालयों से प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए लगातार मेहनत की। कठिन परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण के बल पर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। उनकी सफलता यह साबित करती है कि यदि दृढ़ संकल्प और लगन हो तो ग्रामीण परिवेश से निकलकर भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।सुधीर सिंह का चयन समीक्षा अधिकारी (विधानसभा सचिवालय, लखनऊ) के पद पर हुआ है। इस उपलब्धि की जानकारी मिलते ही परिवार में जश्न का माहौल बन गया। परिजनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की, वहीं गांव के लोगों ने भी घर पहुंचकर बधाई दी। पूरे गांव में गर्व और उत्साह का माहौल देखने को मिला।सुधीर सिंह के पिता अमर सिंह, जो पेशे से अधिवक्ता हैं, ने बेटे की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह उपलब्धि पूरे परिवार के लिए गौरव का क्षण है। उन्होंने बताया कि सुधीर ने हमेशा मेहनत और ईमानदारी को प्राथमिकता दी, जिसका परिणाम आज सबके सामने है। परिवार के अन्य सदस्यों ने भी इस सफलता को उनके कठिन परिश्रम का फल बताया।इस उपलब्धि पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और गणमान्य लोगों ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है। भाजपा विधायक बाबूराम पासवान, पूरनपुर ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि अपूर्व सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से सुधीर सिंह को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।सुधीर सिंह की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि पूरे जनपद पीलीभीत के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। उनकी सफलता ने यह संदेश दिया है कि कठिन परिस्थितियों में भी अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर की जाए, तो सफलता जरूर मिलती है।
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