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भैरो कलां बना विकास का मॉडल: कीचड़ से निकलकर पक्की सड़कों और रोशनी से जगमगाया गांव

प्रधान–सचिव की टीमवर्क से बदली तस्वीर: भैरो कलां में योजनाओं का दिखा जमीनी असर

सरकारी धन का सही उपयोग बना मिसाल: भैरो कलां में सड़कों, सफाई और सुविधाओं की नई पहचान

गांवों का कायाकल्प करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार हर साल एक-एक ग्राम पंचायत को लाखों करोड़ों रुपए देती हैं।इन पैसों से वहां शौचालय,नाली खडंजा, पानी,साफ सफाई,पक्के निर्माण होने चाहिए।घर का पानी सड़क पर न बहे ये भी पंचायत का काम होता है।जिसके लिए नालियों का निर्माण कराया जाता है। इसी तरह सरकार की योजनाओं को बखूबी समझते और सरकारी धन का सदुपयोग करते हुए ग्राम पंचायत भैरोंकलां में सचिव और ग्राम प्रधान द्वारा कराए गए अच्छे कार्यों की जनता भी प्रशंसा करती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने में ग्राम पंचायत भैरो कलां आज एक मिसाल बनकर उभरी है। इस परिवर्तन के पीछे जहां ग्राम प्रधान की सक्रियता है, वहीं पंचायत सचिव बृजेश कुमार की सूझबूझ, ईमानदार कार्यशैली और निरंतर निगरानी ने गांव की तस्वीर ही बदल दी है। गांव के ग्रामीणों के मुताबिक कुछ वर्ष पहले तक भैरो कलां की स्थिति बिल्कुल अलग थी। गांव की सड़कों पर जगह-जगह कीचड़ भरा रहता था, जिससे ग्रामीणों का निकलना तक मुश्किल हो जाता था। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते थे। लेकिन आज वही गांव पक्की इंटरलॉक और आरसीसी सड़कों से चमकता नजर आ रहा है। पंचायत घर का भी कायाकल्प किया गया है। पंचायत घर का भी सुंदर और व्यवस्थित तरीके से कायाकल्प किया गया है। पहले जहां पंचायत भवन साधारण और अव्यवस्थित स्थिति में था, वहीं अब इसका कायाकल्प कर आकर्षक रूप दिया गया है। साफ-सफाई, बैठने की बेहतर व्यवस्था और व्यवस्थित कार्यालय संचालन के चलते पंचायत घर अब ग्रामीणों के लिए सुविधाजनक केंद्र बन गया है।यह बदलाव योजनाबद्ध तरीके से कार्य कराने और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का परिणाम है, जिसकी अगुवाई सचिव बृजेश कुमार ने बखूबी की। वही गांव सिर्फ सड़कों तक ही विकास सीमित नहीं रहा। गांव के श्मशान घाट की जर्जर स्थिति को सुधारते हुए वहां तक जाने वाले मार्ग का भी कायाकल्प किया गया। अब श्मशान घाट व्यवस्थित और सुगम पहुंच वाला बन चुका है, जिससे ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ता है। वही भैरो कलां में पहले अंधेरे की समस्या भी बड़ी थी। गांव में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था न होने से लोगों को रात में आवागमन में परेशानी होती थी। सचिव बृजेश कुमार की पहल पर अब हर खंभे पर स्ट्रीट लाइट और बल्ब लगाए गए हैं, जिससे गांव रात में भी रोशन रहता है और सुरक्षा की भावना मजबूत हुई है।स्वच्छता के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। गांव में नियमित रूप से नालियों की सफाई और सड़कों पर झाड़ू लगाई जाती है। इससे न सिर्फ गांव साफ-सुथरा रहता है, बल्कि बीमारियों पर भी काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है।इसके अलावा ग्रामीणों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सामुदायिक शौचालय और आईसीसी सेंटर का निर्माण कराया गया है। स्वास्थ्य सेवाओं को गांव तक पहुंचाने के लिए आयुष्मान आरोग्य सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिससे अब ग्रामीणों को छोटी-बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए अब इधर-उधर भटकना नहीं पड़ता है।सचिव बृजेश कुमार की कार्यशैली का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए गांव में ही सचिवालय के माध्यम से सभी आवश्यक कार्य सुनिश्चित किए। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और ग्रामीणों का विश्वास भी मजबूत हुआ है। पंचायत में कराएं गए विकास कार्यों के बारे में गांव के लोगों से बातचीत की गई, तो अधिकांश ग्रामीणों ने एक स्वर में सचिव बृजेश कुमार और ग्राम प्रधान के कार्यों की सराहना की। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में जो बदलाव आज दिख रहा है, वह पहले कभी नहीं देखा गया।भैरो कलां आज इस बात का उदाहरण बन चुका है कि यदि जनप्रतिनिधि और अधिकारी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम करें, तो सरकारी योजनाएं वास्तव में गांवों की तस्वीर बदल सकती हैं। सचिव बृजेश कुमार की सक्रियता और दूरदर्शिता ने इस बदलाव को संभव कर दिखाया है, जो अन्य पंचायतों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

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