बार्डर पर सड़क बनी सियासत का मुद्दा, मंत्री और विधायकों की कार्यशैली पर सवाल उठाकर अपनी ही सरकार की खोली पोल

बार्डर पर सड़क बनी सियासत का मुद्दा, मंत्री और विधायकों की कार्यशैली पर सवाल उठाकर अपनी ही सरकार की खोली पोल
पीलीभीत। कलीनगर तहसील के अंतिम छोर पर बसे सुंदरपुर गांव से एक वीडियो ने स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी है। क्षेत्र पंचायत सदस्य के पति सुरेश राहा सहित अन्य ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी ही पार्टी की सरकार और जनप्रतिनिधियों पर सवाल खड़े कर दिए। सड़क पर खड़े होकर उन्होंने जर्जर मार्ग की हालत दिखाई और सुरेश ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता होने के बावजूद उन्हें जनता के बीच जवाब देना पड़ रहा है। सुंदरपुर गांव की सीमा उत्तराखंड और नेपाल से सटी हुई है। सुंदरपुर से मेलाघाट– खटीमा और कलीनगर –पूरनपुर को जोड़ने वाला यह मार्ग करीब 10 ग्राम पंचायतों के लोगों की जीवनरेखा माना जाता है। छात्र, व्यापारी, किसान और आम राहगीर रोज इसी सड़क से आवागमन करते हैं। लेकिन वर्षों से यह सड़क गड्ढों, टूटी सतह और धूल-कीचड़ से भरी पड़ी है। बरसात के मौसम में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है। वीडियो में सुरेश राहा ने उत्तराखंड की सीमा में बनी बेहतर सड़क की तुलना यूपी की जर्जर सड़क से की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सीमा तक उत्कृष्ट सड़क बनवाई है, लेकिन यूपी की सीमा में प्रवेश करते ही सड़क की स्थिति बदल जाती है। उनका सवाल था कि जब पूरनपुर विधानसभा और जिले में भाजपा के विधायक और सांसद मौजूद हैं तो फिर यह मार्ग अब तक दुरुस्त क्यों नहीं हो पाया।उन्होंने सड़क किनारे लगे उस बोर्ड का भी जिक्र किया, जिस पर जनप्रतिनिधियों के नाम और पद अंकित हैं। उनका कहना है कि सड़क निर्माण के लिए कई बार संबंधित मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों को पत्र लिखे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वीडियो में एक अन्य व्यक्ति विवेक वर्मा (रमनरा) ने भी खुद को भाजपा कार्यकर्ता बताते हुए नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मंत्री को कई बार पत्र लिखे गए हैं, लेकिन सड़क का निर्माण टुकड़ों में किया जा रहा है। “हमें टुकड़ों में सड़क नहीं चाहिए, पूरे मार्ग का निर्माण चाहिए,” उन्होंने कहा। उनका कहना है कि इस मार्ग से 10 ग्राम पंचायतों के लोग पूरनपुर, पीलीभीत और अन्य स्थानों तक जाते हैं। खराब सड़क के कारण लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। विवेक वर्मा ने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ता होने के नाते जनता के सवालों का सामना उन्हें ही करना पड़ता है। चुनाव के दौरान वोट मांगने जाते हैं तो लोग सड़क की हालत का मुद्दा उठाते हैं। ऐसे में कार्यकर्ताओं को जवाब देना मुश्किल हो जाता है। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि उत्तराखंड सीमा के बाद सड़क चमचमाती नजर आती है, जबकि यूपी सीमा में गड्ढों और टूटी सड़क का नजारा है। सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है और लोग जनप्रतिनिधियों से जवाब मांग रहे हैं।इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति को गर्मा दिया है। अब सवाल यह है कि क्या यह मामला केवल सोशल मीडिया की बहस बनकर रह जाएगा, या फिर संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस कदम उठाएंगे। क्षेत्र की जनता फिलहाल जवाब और समाधान दोनों का इंतजार कर रही है।




