प्रधानी चुनाव की आहट के बीच ‘गोवंश अभियान’ तेज, ट्रैक्टर-ट्रालियों से पशुओं के पहुंचने पर कई गांवों में विरोध

प्रधानी चुनाव की आहट के बीच ‘गोवंश अभियान’ तेज, ट्रैक्टर-ट्रालियों से पशुओं के पहुंचने पर कई गांवों में विरोध
पूरनपुर/पीलीभीत। पूरनपुर तहसील क्षेत्र में इन दिनों हाईवे, खेतों और गांवों की सड़कों पर बड़ी संख्या में गोवंशीय पशु घूमते नजर आ रहे हैं। प्रधानी चुनाव नजदीक आते ही संभावित प्रत्याशी और स्थानीय जनप्रतिनिधि इन पशुओं को गौशालाओं में भिजवाने की कवायद में जुट गए हैं। बुधवार को घुंघचाई क्षेत्र में गोवंश पकड़वाने का अभियान चलाया गया, जिसके बाद देर शाम तक अलग-अलग गांवों में ट्रैक्टर-ट्रालियों के पहुंचने से हलचल मच गई।जानकारी के अनुसार अभियान के दौरान आधा दर्जन से अधिक गोवंशीय पशुओं को पकड़ा गया और ट्रैक्टर-ट्रालियों में भरकर रवाना किया गया। शाम करीब पांच बजे पशुओं से भरी ट्रालियां गांव रम्पुरा कपूरपुर पहुंचीं तो ग्रामीणों ने एतराज जताया। उनका कहना था कि बिना स्पष्ट जानकारी के इस तरह पशुओं को लाया जा रहा है, जिससे भ्रम और आशंका की स्थिति बन रही है। इसके बाद शाम छह बजे ट्रालियां पूरनपुर क्षेत्र में देखी गईं और रात करीब आठ बजे गोवंश भरी ट्रालियां रघुनाथपुर गांव के पास पहुंचीं। वहां से सभी ट्रैक्टर-ट्रालियां अमरैया खाता के नजदीक पहुंचीं, जहां काफी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। मौके पर मौजूद लोगों को बताया गया कि एक जनप्रतिनिधि के निर्देश पर गोवंशीय पशुओं को पकड़कर गौशाला भेजने की प्रक्रिया की जा रही है।
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चुनावी सरगर्मी में बढ़ी सक्रियता
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सामाजिक संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी है। अंतर्राष्ट्रीय हिंदू परिषद और बजरंग दल से जुड़े गौ रक्षा प्रमुख के जिला प्रभारी शिवम भदौरिया ने कहा कि प्रधानी चुनाव नजदीक आने के चलते अचानक गोवंशीय पशुओं की चिंता बढ़ गई है। उनके अनुसार कई प्रत्याशी गांवों के आसपास घूम रहे पशुओं को पकड़वाकर गौशालाओं में भिजवाने के प्रयास में हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में कजरी गौशाला के बाहर पशुओं की दुर्दशा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिससे व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हुए थे। ऐसे में केवल चुनावी दिखावे के बजाय गोवंश की नियमित देखभाल, चारा-पानी और सुरक्षित आवास की स्थायी व्यवस्था जरूरी है।
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पशुओं के पहुंचने पर विरोध और समर्थन
लगातार अलग-अलग गांवों में ट्रैक्टर-ट्रालियों के पहुंचने से ग्रामीणों में असमंजस बना रहा। कुछ लोगों ने आवारा पशुओं को गौशाला भेजने का समर्थन किया, तो कई ने प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट आदेश और पारदर्शिता की मांग उठाई।क्षेत्र में गोवंशीय पशुओं की बढ़ती संख्या से किसानों को फसलों की सुरक्षा और सड़क हादसों की भी चिंता है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनावी समय पर अस्थायी अभियान चलाने के बजाय स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि समस्या का दीर्घकालिक निस्तारण हो सके। फिलहाल प्रशासन की ओर से अभियान को लेकर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। हालांकि क्षेत्र में इस कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।




