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बाढ़ सुरक्षा के वादे पर खत्म हुआ धरना, बरसात से पहले न हुआ काम तो जल समाधि का ऐलान

बाढ़ सुरक्षा के वादे पर खत्म हुआ धरना, बरसात से पहले न हुआ काम तो जल समाधि का ऐलान

पीलीभीत। कलीनगर तहसील सीमा क्षेत्र में बाढ़ से बचाव के स्थायी इंतजाम की मांग को लेकर 9 जनवरी से चल रहा अनिश्चितकालीन धरना रविवार को प्रशासनिक आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। धरना स्थल पर पहुंचे विधायक बाबूराम पासवान और जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार ने ग्रामीणों को शीघ्र बाढ़ बचाव कार्य शुरू कराने का भरोसा दिलाया। इस दौरान ग्रामीणों की उच्च अधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भी बातचीत कराई गई।

गांव के गोविंद ने बताया कि विधायक और जिलाधिकारी ने 15 दिन के भीतर बाढ़ से बचाव से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर शासन स्तर पर भेजने और आगे की कार्रवाई शुरू कराने का आश्वासन दिया है। इसी भरोसे के बाद ग्रामीणों ने धरना समाप्त करने का निर्णय लिया।गांव के मधुसूदन ने बताया कि करीब 300 मीटर लंबा तटबंध बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसमें 4 से 5 ठोकर भी शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी ने प्रमुख सचिव से बात कर शीघ्र समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है।
हालांकि धरना समाप्त हो गया है, लेकिन ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेताया है कि यदि बरसात से पहले तटबंध निर्माण और बाढ़ से स्थायी सुरक्षा के लिए ठोस कार्य शुरू नहीं हुआ तो वे दोबारा आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों ने यहां तक चेतावनी दी कि समय रहते काम न होने की स्थिति में पूरा गांव जल समाधि लेने जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होगा।
गौरतलब है कि कलीनगर तहसील सीमा क्षेत्र में शारदा नदी से हर वर्ष आने वाली बाढ़ से परेशान ग्रामीणों ने नो मैन्स लैंड पर धरना शुरू किया था। ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी थी कि यदि ठोस और स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे “काम नहीं तो वोट नहीं” के नारे के साथ आंदोलन को और तेज करेंगे। शनिवार को एसडीएम प्रमेश कुमार, तहसीलदार बीरेद्र कुमार और नायब तहसीलदार अक्षय कुमार ने स्थल निरीक्षण कर ग्रामीणों से संवाद किया था।अधिकारियों ने स्थलीय निरीक्षण कर समस्या की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने का आश्वासन दिया था। ग्रामीणों का कहना था कि शारदा नदी हर साल उफान पर आ जाती है, जिससे क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। बाढ़ खंड द्वारा हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन बाढ़ से बचाव के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई। इसके अलावा नेपाल की ओर से नदी की धारा में हो रहे बदलाव के कारण भारतीय क्षेत्र में बाढ़ और कटान का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस समस्या को लेकर कई बार विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ से बचाव के लिए करीब नौ करोड़ रुपये का प्रस्ताव पहले ही शासन को भेजा जा चुका था, जिसे फिलहाल खारिज कर दिया गया है। भारत-नेपाल सीमा के समीप लगभग 200 से 300 मीटर क्षेत्र में पत्थरों से तटबंध निर्माण, तटबंध किनारे पिचिंग कार्य तथा 4 से 5 ठोकर स्पर निर्माण की मांग रखी। फिलहाल प्रशासनिक आश्वासन के बाद ग्रामीणों में उम्मीद जगी है और सभी की निगाहें आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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