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बिजली– पानी–सड़क सहित अन्य सुविधाओं से वंचित है कलीनगर का यह गांव, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

बिजली– पानी–सड़क सहित अन्य सुविधाओं से वंचित है कलीनगर का यह गांव, ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

पीलीभीत। कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव सेल्हा का मजरा सातझाल आज भी विकास की मुख्यधारा से कोसों दूर नजर आ रहा है। रविवार समाचार भारत 24 की टीम ने गांव पहुंचकर हकीकत परखी तो ग्रामीणों का दर्द झलक उठा। आधुनिक युग में जहां गांव-गांव बिजली, सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच चुकी हैं, वहीं ग्रामीण आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। गांव में न बिजली है, न शुद्ध पेयजल की व्यवस्था और न ही पक्की सड़क। सर्दी हो या भीषण गर्मी, ग्रामीण बिना बिजली के ही जीवन यापन करने को मजबूर हैं। शिक्षा व्यवस्था की हालत भी बेहद दयनीय है। गांव के सरकारी प्राथमिक विद्यालय में केवल एक ही शिक्षक तैनात है, जिसके चलते बच्चों को समुचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है। खुले में संचालित हो रहे स्कूल में संसाधनों का भी अभाव है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते गांव की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।रविवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने गांव में विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में महिलाओं की भागीदारी सबसे अधिक रही। महिलाओं ने एक स्वर में गांव में बिजली, पानी, सड़क और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाए जाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे तहसील मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने तीखे शब्दों में कहा कि चुनाव के समय योगी और मोदी के नाम पर वोट मांगे जाते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कोई भी जनप्रतिनिधि गांव की सुध लेने नहीं आता। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सेल्हा गांव को भी विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें भी सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार मिल सके।

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