मरौरी ब्लाक प्रमुख सभ्यता देवी के अधिकार सीज करने पर विरोध तेज़, बीडीसी सदस्यों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, आरोप बताए झूठे

मरौरी ब्लाक प्रमुख सभ्यता देवी के अधिकार सीज करने पर विरोध तेज़, बीडीसी सदस्यों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन
पीलीभीत। मरौरी विकासखंड की ब्लॉक प्रमुख सभ्यता देवी के अधिकार निलंबित किए जाने के बाद क्षेत्र में राजनीति गरमा गई है। प्रमुख समर्थक बीडीसी सदस्यों ने मंगलवार को ज़िला अधिकारी से मिलकर प्रमुख के अधिकार बहाल करने की मांग की। इस दौरान सदस्यों ने कहा कि सभ्यता देवी पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे, निराधार और राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं।
सदस्यों द्वारा दिए गए ज्ञापन में कहा गया है कि प्रमुख पर ₹59 हजार की फर्जी हस्ताक्षर कर भुगतान कराने का आरोप लगाया गया, जबकि यह राशि बीडीसी सदस्यों के मानदेय से संबंधित थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानदेय की प्रक्रिया पूरी तरह बीडीओ और ग्राम पंचायत सचिव के माध्यम से संचालित होती है, ऐसे में किसी भी प्रकार की अनियमितता में प्रमुख की भूमिका असंभव है।
सदस्यों ने यह भी कहा कि मानदेय न मिलने, सदस्यों पर दबाव डालने या किसी प्रकार के विवाद के आरोप सिर्फ अफवाह हैं। किसी भी बीडीसी सदस्य ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की। इसके बावजूद प्रमुख के अधिकार निलंबित कर दिए गए, जो प्रशासनिक न्याय की भावना के विपरीत है।
ज्ञापन में स्मृति द्वार निर्माण को लेकर उठाए गए विवाद को भी पूरी तरह राजनीतिक षड्यंत्र बताया गया। सदस्यों का कहना है कि कुछ विरोधी तत्वों ने सभ्यता देवी की छवि धूमिल करने और पद की गरिमा घटाने के उद्देश्य से झूठे आरोप गढ़े हैं।
सदस्यों ने जांच समिति की निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना है कि समिति में शामिल एक सदस्य स्वयं शिकायतकर्ता है, जबकि दूसरा व्यक्ति ठेकेदारी कार्यों से जुड़ा हुआ है, ऐसे में जांच का निष्पक्ष होना संभव नहीं। उन्होंने डीएम से आग्रह किया कि ऐसी जांच समिति को बदलकर स्वतंत्र जांच अधिकारी नियुक्त किए जाएं, ताकि सत्य सामने आ सके।
सदस्यों ने कहा कि सभ्यता देवी ने अब तक विकासखंड में पारदर्शी और जनहितकारी कार्य किए हैं। उनके नेतृत्व में क्षेत्र में सड़क, पुलिया, पेयजल और आवास योजनाओं में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। ऐसे में उनके अधिकार सीज करना क्षेत्र के विकास को रोकने जैसा है। अंत में बीडीसी दल ने मांग की कि सभी तथ्यों और अभिलेखों का परीक्षण कर प्रमुख सभ्यता देवी के अधिकार तत्काल प्रभाव से बहाल किए जाएं और जांच में राजनीतिक हस्तक्षेप न होने दिया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में बड़ी संख्या में बीडीसी सदस्य मौजूद रहे।




