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नन्ही आर्टिस्ट की कलाकृतियों ने सबका दिल जीता

जानकी देवी खादी ग्रामोद्योग सेवा संस्थान भुरजूनिया में खादी महोत्सव के प्रदर्शनी मेले में लगी आकर्षक कला स्टॉल की एस.एस.बी. ने की प्रशंसा

नन्ही आर्टिस्ट की कलाकृतियों ने सबका दिल जीता

जानकी देवी खादी ग्रामोद्योग सेवा संस्थान भुरजूनिया में खादी महोत्सव के प्रदर्शनी मेले में लगी आकर्षक कला स्टॉल की एस.एस.बी. ने की प्रशंसा

पूरनपुर,पीलीभीत।जानकी देवी खादी ग्रामोद्योग सेवा संस्थान, भुरजूनिया में चल रहे खादी महोत्सव एवं चार दिवसीय प्रदर्शनी मेले में इस बार एक विशेष आकर्षण रहा एक नन्ही आर्टिस्ट बच्ची की आर्ट स्टॉल, जिसने अपनी कला और सृजनशीलता से आगंतुकों का मन मोह लिया।इस बच्ची द्वारा तैयार की गई हैंडमेड पेंटिंग्स, रंग-बिरंगे स्केच,रचनात्मक हस्तकला वस्तुएं और पुनर्चक्रित (रिसाइकल्ड) सामग्री से बने आकर्षक सजावटी आइटम्स लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बने रहे। प्रदर्शनी देखने आए लोगों ने उसकी प्रतिभा और कल्पनाशक्ति की खुलकर सराहना की।मेले में पहुंचे एसएसबी. (संस्थान के वरिष्ठ सदस्य / अधिकारी) ने भी उस नन्ही कलाकार की कला की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा इतनी कम उम्र में इस तरह की सृजनात्मकता और कला के प्रति लगाव प्रेरणादायक है। ऐसे बच्चों को प्रोत्साहन देना समाज की जिम्मेदारी है ताकि भविष्य में वे देश का नाम रोशन कर सकें।आयोजकों की ओर से भी बच्ची को सम्मानित किया गया तथा उसकी रचनात्मक कला की सराहना करते हुए कहा गया कि ऐसी प्रतिभाएं ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विचार को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।जानकी देवी खादी ग्रामोद्योग सेवा संस्थान में चल रहे इस खादी महोत्सव मेले में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, महिलाएं, छात्र-छात्राएं और ग्रामवासी पहुंचे।मेले में खादी वस्त्रों, हर्बल उत्पादों, जैविक खाद्य सामग्री, हस्तशिल्प वस्तुओं और ग्रामोद्योग उत्पादों की भी आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई।
इसके साथ ही खादी सम्मान यात्रा, खादी प्रतिज्ञा, स्वदेशी उत्पादों के प्रचार और आत्मनिर्भर भारत अभियान से संबंधित जनजागरण कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।संस्थान के प्रबंधक ने कहा कि नन्ही बच्ची की यह कला न केवल उसकी व्यक्तिगत प्रतिभा का उदाहरण है बल्कि यह संदेश देती है कि हर व्यक्ति में आत्मनिर्भरता और सृजनशीलता की अपार संभावनाएं हैं।खादी सिर्फ वस्त्र नहीं, बल्कि एक सोच है — स्वावलंबन और सादगी की सोच। जब बच्चे इस दिशा में कदम बढ़ाते हैं, तो यह समाज के उज्जवल भविष्य की निशानी है।संस्थान ने घोषणा की कि इस नन्ही कलाकार को आगे भी ऐसे आयोजनों में भाग लेने के अवसर दिए जाएंगे। साथ ही, खादी ग्रामोद्योग से जुड़ी रचनात्मक कार्यशालाओं में उसकी भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी ताकि उसकी कला और निखर सके।कार्यक्रम के अंतिम दिन समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा, जिनमें इस नन्ही आर्टिस्ट का नाम प्रमुखता से शामिल रहेगा।भुरजूनिया के इस मेले ने यह साबित कर दिया कि सृजनशीलता और प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। नन्ही कलाकार की यह स्टॉल जहां कला प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र रही, वहीं इसने स्थानीय लोगों में खादी, स्वदेशी और आत्मनिर्भर भारत के प्रति नई चेतना भी जगाई।

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