डा. आई. ए. ख़ान ने फिर की इंसानियत की सेवा दिव्यांगजनों को बाँटी बैसाखियाँ,बाढ़ पीड़ितों को भेजी मदद”

“डा. आई. ए. ख़ान ने फिर की इंसानियत की सेवा दिव्यांगजनों को बाँटी बैसाखियाँ,बाढ़ पीड़ितों को भेजी मदद”
धर्म, हर जाति के लिए एक समान डॉ. ख़ान बने इंसानियत की पहचान”है
संपूर्णानगर,पीलीभीत।पर्यावरण प्रेमी, समाजसेवी और सर्वधर्म समानता के प्रतीक डा. आई. ए. ख़ान ने एक बार फिर यह साबित किया कि इंसानियत से बढ़कर कोई धर्म नहीं होता। हर साल की तरह इस वर्ष भी उन्होंने एक दर्जन दिव्यांगजनों को बैसाखियाँ बांटकर उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरी और उनसे दुआएँ एवं आशीर्वाद प्राप्त किया।डा. ख़ान ने इस अवसर पर कहा अगर मैं किसी भी व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ला सकूँ चाहे वह हिंदू, मुस्लिम, सिख या ईसाई किसी भी धर्म या जाति का हो तो मैं खुद को बहुत सौभाग्यशाली मानता हूँ। इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है।मानवता की सेवा के अपने संकल्प को आगे बढ़ाते हुए डा. ख़ान ने हाल ही में पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता हेतु धनराशि और दवाइयाँ भेजीं। उनके इस कार्य की स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सराहना की जा रही है।डा. आई. ए. ख़ान का जीवन मानवता की सेवा के लिए समर्पित है। पिछले तीन दशकों से वे बिना धर्म और जाति का भेदभाव किए समाज की सेवा में लगे हुए हैं। वे ग़रीबों के अंतिम संस्कार, बीमारी में सहयोग, बाढ़ एवं आगजनी जैसी आपदाओं में राहत कार्य, बच्चों की शिक्षा, और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों में हमेशा अग्रणी रहे हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार, डा. ख़ान को कभी किसी के धर्म, जाति या समाज से नहीं बल्कि उसके दुःख से मतलब होता है।उनके प्रयासों से अनेक परिवारों को नई दिशा और आशा मिली है।डा. ख़ान की संवेदनशीलता और समाजसेवा की भावना उनके परिवार की विरासत से आई है। उनका परिवार लंबे समय से हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक रहा है। डा. ख़ान कहते हैं,मेरे घर में इंसानियत को सबसे ऊँचा दर्जा दिया जाता है। धर्म, जाति या पंथ से पहले हम ‘इंसान’ हैं, यही शिक्षा मुझे बचपन से मिली।चाहे कोई धार्मिक झांकी हो, रैली हो या सामाजिक कार्यक्रम, डा. ख़ान हमेशा सेवा के लिए मौजूद रहते हैं। वे प्रत्येक आयोजन में सफाई, पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हैं।डा. आई. ए. ख़ान को समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अनेक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हो चुके हैं।इनमें प्रमुख हैं,आइकन ऑफ एशिया अवॉर्ड,पर्यावरण रक्षक सम्मान,कोरोना वैरियर अवॉर्ड,शान-ए-राजपूताना सम्मान,शान-ए-लखीमपुर सम्मान,संपूर्णानगर रत्न पुरस्कार,इन सम्मानों के बावजूद वे बेहद विनम्र बने हुए हैं। उनका कहना है सम्मान मेरे लिए प्रेरणा हैं, पर असली पुरस्कार तब मिलता है जब किसी ज़रूरतमंद की आँखों में खुशी की चमक दिखती है।डा. ख़ान ने बताया कि आने वाले समय में वे पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के प्रसार पर अधिक ध्यान देंगे। वे संपूर्णानगर क्षेत्र में एक ‘हरित सेवा केंद्र’ खोलने की योजना बना रहे हैं, जहाँ पर्यावरण के साथ-साथ समाजसेवा से जुड़े कार्यों को नियमित रूप से संचालित किया जाएगा।आज जब समाज में धर्म और जाति के नाम पर दूरी बढ़ती जा रही है, ऐसे समय में डा. आई. ए. ख़ान जैसे लोग मानवता और एकता की मिसाल हैं। उनकी सोच,सेवा और संवेदनशीलता समाज को यह याद दिलाती है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक ही है।




