पीलीभीत में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन का हंगामा, बॉर्डर पर धान से भरी ट्रॉलियां रोकीं
व्यापारियों पर किसानों की आड़ में धान लाने का आरोप, एसडीएम और पुलिस ने संभाली स्थिति

- पीलीभीत में राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन का हंगामा, बॉर्डर पर धान से भरी ट्रॉलियां रोकीं
व्यापारियों पर किसानों की आड़ में धान लाने का आरोप, एसडीएम और पुलिस ने संभाली स्थिति
राइस मिल मालिकों और आढ़तियों पर किसानों का शोषण करने का लगाया आरोप
पूरनपुर, पीलीभीत।
पीलीभीत की सीमा पर बुधवार को राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने हंगामा करते हुए बाहरी जिले से आ रही धान से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को रोक दिया। संगठन के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बाहरी जनपदों के व्यापारी किसानों की आड़ में धान लेकर आ रहे हैं, जिससे स्थानीय किसानों को अपने उत्पाद का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है। अचानक हुए इस विरोध प्रदर्शन से बॉर्डर पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।सूचना पर प्रशासन हरकत में आया और मौके पर पहुंचे पूरनपुर उपजिलाधिकारी अजीत प्रताप सिंह तथा सेहरामऊ इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह पुलिस बल ने स्थिति को संभाला। उन्होंने किसानों से बातचीत कर मामले को शांत कराने का प्रयास किया। थाना पूरनपुर और खुटार सीमा के पास राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने धान से भरी कई ट्रैक्टर ट्रॉलियां सुबह रोक लीं। मामले की सूचना पर पुलिस पहुंच गई। वार्ता के प्रयास शुरू कर दिए गए। एसडीएम ने किसानों को बमुश्किल समझा बुझाकर शांत कराया। किसानों का कहना है कि अन्य जनपदों की अपेक्षा जिले की तहसील पूरनपुर में धान के रेट अच्छे हैं। इसलिए लखीमपुर, शाहजहांपुर के किसान अपनी ट्रैक्टर−ट्रॉलियों में धान भरकर बिक्री करने पहुंच रहे हैं। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने बुधवार को सेहरामऊ उत्तरी इलाके कजरी निरंजनपुर आसाम हाइवे पर जनपद की सीमा पर बाहरी जिलों से आ रहे धान से भरे कई ट्रैक्टर−ट्रॉलियाें को रोक लिया। आरोप है कि जिले में बाहरी धान की आपूर्ति पर प्रशासनिक रोक के बावजूद, राइस मिलों में इसकी सप्लाई जारी है। किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने स्थानीय किसानों के धान को उचित मूल्य पर खरीदने के लिए बाहरी जिलों से धान आने पर रोक लगाई थी। हालांकि, आढ़ती राइस मिलरों के साथ मिलीभगत कर इन नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि बाहरी धान किसानों के वाहनों के माध्यम से जिले में लाया जा रहा है। सीधे राइस मिलों तक पहुंचाया जा रहा है। विरोध कर रहे किसानों की शिकायत है कि राइस मिलर स्थानीय किसानों का धान न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम, यानी 1300 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीद रहे हैं। किसानों का आरोप है कि बाहरी जिलों से सस्ता धान मंगवाने के कारण मिलर स्थानीय किसानों से धान खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं, जिससे उन्हें मजबूरी में कम दाम पर अपना धान बेचना पड़ रहा है।सूचना पर पहुंचे एसडीएम ने कहा कि जिले में बाहर से आने वाले धान पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और जांच के बाद ही खरीदी की अनुमति दी जाएगी।राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने बताया कि जिले में कई व्यापारी किसानों की फर्जी रसीद दिखाकर बाहरी राज्यों और जनपदों से सस्ते दाम पर धान लाकर बेच रहे हैं। इससे स्थानीय किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य पर धान बेचने में दिक्कतें आ रही हैं। संगठन ने प्रशासन से मांग की कि जिले की सीमाओं पर चेकिंग अभियान चलाकर बाहरी धान की अवैध खरीद-बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए।इस दौरान किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि बाहरी धान की आवाजाही पर रोक नहीं लगी तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।किसानों का आरोप है कि यह धान किसानों की आड़ में व्यापारियों का लाया जा रहा है। इसी के चलते राइस मिलों पर मनमाने दाम में यहां के किसानों का धान खरीदा जा रहा है। किसान इसको लेकर सोमवार को मंडी समिति में आंदोलन भी कर चुके हैं। बुधवार को भी उनकी बैठक दोबारा मंडी समिति में है। वहीं, पुलिस व प्रशासन ने किसानों को भरोसा दिलाया कि किसी भी किसान का शोषण नहीं होने दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।मौके पर बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।
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इनसेट
किसानों को समर्थन मूल्य से वंचित रखने की साज़िश,आढ़तो और राइस मिलो पर औने पौने दामों में खरीदा जा रहा धान सरकार भले ही किसानों को राहत देने के लिए धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2369 रुपए प्रति कुंतल घोषित कर चुकी है, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है। पीलीभीत, बीसलपुर और पूरनपुर में सरकारी धान खरीद केंद्रों पर अव्यवस्था और अधिकारियों की लापरवाही के चलते किसान अपने ही धान का सही मूल्य पाने से वंचित हो रहे हैं।किसानों की फसल का बाजिब मूल्य देने के लिए सरकार ने धान का 2369 व ए ग्रेड का 2389 रुपए प्रति कुंतल समर्थन मूल्य घोषित किया है। इसके बावजूद आढ़तों और राइस मिलों पर किसानों का 1600 से 1700 रुपए कुंतल धान खरीद की जा रही है। आगामी फसल की तैयारी के लिए किसानों को मजबूरन अपनी फसल को सस्ते दामों में बेचना पड़ रहा है। बहीं कर्दा, सीडी सहित अन्य के नाम पर भी अलग से किसानों से कटौती की जा रही है।




