यूपी

मरौरी ब्लॉक में 2.74 करोड़ का टेंडर घोटाला उजागर

2.74 करोड़ के टेंडर रद्द, डीएम बोले ‘भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं’

मरौरी ब्लॉक में 2.74 करोड़ का टेंडर घोटाला उजागर

2.74 करोड़ के टेंडर रद्द, डीएम बोले ‘भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं’

डीएम ने सभी टेंडर किए रद्द ब्लॉक प्रमुख और बीडीओ पर कार्रवाई की तलवार लटकी

पीलीभीत।मरौरी विकासखंड में विकास कार्यों की आड़ में चल रहे घोटाले का पर्दाफाश होते ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। लगभग ₹2.74 करोड़ रुपये के टेंडरों में गंभीर अनियमितताएं पकड़ी गईं, जिसके बाद जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने तत्काल प्रभाव से सभी टेंडर रद्द करने का आदेश जारी किया है।सूत्रों के अनुसार, ब्लॉक प्रमुख सभ्यता वर्मा और बीडीओ लियाकत अली पर आरोप है कि दोनों ने मिलीभगत से अपने चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर प्रक्रिया को ही नियमों के विपरीत मोड़ दिया।स्थानीय ठेकेदारों को जानकारी से दूर रखने के लिए टेंडर नोटिस स्थानीय अखबारों की जगह बरेली के समाचार पत्रों में प्रकाशित कराए गए, जिससे मरौरी क्षेत्र के ठेकेदारों को इसका पता ही न चल सका।क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ठेकेदारों ने इस खेल का भंडाफोड़ करते हुए जिलाधिकारी को लिखित शिकायत सौंपी और मामले की जांच की मांग की।शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने सीडीओ राजेंद्र कुमार श्रीवास की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।जांच में पाया गया कि टेंडरों का प्रकाशन नियम विरुद्ध तरीके से किया गया है और पारदर्शिता के सभी सरकारी दिशा-निर्देशों की खुली अवहेलना हुई है।जांच रिपोर्ट मिलने के बाद डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने न केवल टेंडर रद्द करने का आदेश दिया, बल्कि संबंधित अधिकारियों से तुरंत स्पष्टीकरण तलब किया है।उन्होंने स्पष्ट कहा विकास कार्यों में भ्रष्टाचार या गड़बड़ी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।सूत्रों का दावा है कि यह पूरा “टेंडर मैनेजमेंट” का खेल ब्लॉक प्रमुख के इशारे पर रचा गया, जिसमें कई अन्य कर्मचारियों और अधिकारियों की सांठगांठ की गंध आ रही है।अब जांच का दायरा बढ़ाए जाने और बड़े नामों के सामने आने की पूरी संभावना जताई जा रही है।मरौरी ब्लॉक में टेंडर घोटाले के खुलासे के बाद विकास विभाग से लेकर पंचायत राज तक हलचल मच गई है।जनता में भी आक्रोश है कि विकास के नाम पर करोड़ों रुपये की लूट कैसे हुई और इतने दिनों तक इसे छुपाया क्यों गया।डीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार दोषी अधिकारियों पर निलंबन या मुकदमा दर्ज किए जाने की तैयारी चल रही है।सभी रद्द किए गए टेंडर अब पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दोबारा जारी किए जाएंगे।पूरे प्रकरण की रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।मरौरी ब्लॉक का यह घोटाला एक बार फिर दिखाता है कि विकास की रकम किस तरह भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाती है।अब देखना यह है कि प्रशासनिक कार्रवाई कितनी गहराई तक जाती है और इस “घोटाले के जाल” में कौन-कौन फंसता है।

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