महर्षि वाल्मीकि जयंती समाजवादी पार्टी कार्यालय पर धूमधाम से मनाई गई
वाल्मीकि जी ने समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना सिखाया —धनपति वर्मा एडवोकेट”

महर्षि वाल्मीकि जयंती समाजवादी पार्टी कार्यालय पर धूमधाम से मनाई गई
“वाल्मीकि जी ने समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना सिखाया —धनपति वर्मा एडवोकेट”
अध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा बोले — महर्षि वाल्मीकि केवल कवि नहीं, सांस्कृतिक मार्गदर्शक थे
पीलीभीत।राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देशानुसार समाजवादी पार्टी द्वारा मंगलवार को नकटादाना स्थित के.जी.एन. 2 कॉलोनी, लोकसभा चुनाव कार्यालय पीलीभीत में महर्षि वाल्मीकि जयंती बड़े ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई।
कार्यक्रम में पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। पूरे परिसर में जयकारों और सांस्कृतिक माहौल के बीच महर्षि वाल्मीकि जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए गए।कार्यक्रम की अध्यक्षता सपा जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा महर्षि वाल्मीकि जी केवल एक महाकवि नहीं थे, बल्कि वे एक सांस्कृतिक मार्गदर्शक और धार्मिक प्रेरणा के स्रोत थे। उनका जीवन इस बात का प्रतीक है कि कोई भी व्यक्ति ज्ञान, तपस्या और भक्ति से महानता प्राप्त कर सकता है।उन्होंने आगे कहा कि महर्षि वाल्मीकि जी प्राचीन भारत के महान ऋषि, कवि और रामायण के रचयिता थे। उन्हें संस्कृत साहित्य का पहला महाकवि (आदिकवि) माना जाता है, और उनके जीवन से जुड़ी धार्मिक व सांस्कृतिक मान्यताएँ आज भी समाज को दिशा देती हैं।महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन से प्रेरणा लें : नफीस अहमद अंसारी।कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए सपा जिला महासचिव नफीस अहमद अंसारी ने कहा महर्षि वाल्मीकि जी का जीवन हमें सिखाता है कि कोई भी व्यक्ति चाहे कितना भी पतित क्यों न हो, तप और भक्ति से महान बन सकता है। वे प्रकृति प्रेमी थे और तपस्या के माध्यम से मानव जीवन के परिवर्तन के प्रतीक हैं।सपा जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र मिश्रा कट्टर ने कहा महर्षि वाल्मीकि जी ने श्रीराम के जीवन पर आधारित रामायण की रचना की, जो संस्कृत साहित्य का प्रथम महाकाव्य है। संस्कृत काव्य में उन्होंने पहली बार श्लेषालंकार का प्रयोग किया। जब उन्होंने क्रौंच पक्षी के वध पर शोक व्यक्त किया, तो वहीं से पहला श्लोक जन्मा।उन्होंने आगे बताया कि महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में ही सीता जी ने लव-कुश को जन्म दिया और वाल्मीकि जी ने ही दोनों को रामायण का गायन सिखाया।128 विधानसभा बरखेड़ा अध्यक्ष धनपति वर्मा एडवोकेट ने कहा महर्षि वाल्मीकि जी का वास्तविक नाम रत्नाकर था। उन्होंने वर्षों तक कठिन तप किया, जिससे उनके शरीर पर चींटियों ने बिल बना लिया और इसीलिए वे ‘वाल्मीकि’ कहलाए। कठोर तपस्या के बाद उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हुआ और वे महान ऋषि के रूप में प्रसिद्ध हुए।कार्यक्रम का सफल संचालन 127 सदर विधानसभा अध्यक्ष इम्तियाज अल्वी ने किया।पूरे कार्यक्रम में श्रद्धा, अनुशासन और समाजवादी एकता की झलक स्पष्ट दिखाई दी।इस अवसर पर बड़ी संख्या में सपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता और सम्मानित नागरिक उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से सपा जिला महासचिव नफीस अहमद अंसारी,सपा जिला उपाध्यक्ष नरेंद्र मिश्रा कट्टर, मखदूम खान, बालकराम सागर, काशीराम सरोज, अकबर अहमद अंसारी,
विधानसभा अध्यक्ष धनपति वर्मा एडवोकेट, इम्तियाज अल्वी, संजय सिंह यादव,अधिवक्ता सभा जिलाध्यक्ष ज्योति प्रकाश शुक्ला एडवोकेट,मजदूर सभा जिलाध्यक्ष मो. तुफैल अहमद,
साथ ही ओमप्रकाश यादव एडवोकेट, अमित पाठक एडवोकेट, नरेश कुमार सागर, रामौतार वर्मा, ऋषिपाल वर्मा, वेद प्रकाश दीक्षित, प्रशांत अवस्थी, अफरोज खान, संजय शर्मा, प्रेमपाल, विशाल कुमार, आदर्श पाण्डे एडवोकेट, पवन शर्मा, श्याम सिंह यादव, राजीव कश्यप, रणजीत सिंह वर्मा, ज्योति प्रकाश शुक्ला एडवोकेट, राजीव यादव एडवोकेट, आशीष कुमार एडवोकेट, रामू पाण्डेय एडवोकेट, और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।कार्यक्रम के अंत में महर्षि वाल्मीकि जी की वाणी और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया गया।सभी उपस्थित लोगों ने समाज में समानता, न्याय और भाईचारे के मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।
महर्षि वाल्मीकि जी का वास्तविक नाम रत्नाकर था। उन्होंने वर्षों तक कठिन तप किया, जिससे उनके शरीर पर चींटियों ने बिल बना लिया और इसीलिए वे ‘वाल्मीकि’ कहलाए। कठोर तपस्या के बाद उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हुआ और वे महान ऋषि के रूप में प्रसिद्ध हुए।“हम सबको वाल्मीकि जी की तरह समाज में समरसता, शिक्षा और जागरूकता फैलाने का संकल्प लेना चाहिए। उनका आदर्श जीवन ही सच्ची समाजवादी भावना का प्रतीक है।
(धनपति वर्मा एडवोकेट)





