नेपाली हाथियों ने फसलें रौंदकर झोपड़ी तोड़ी, ग्रामीणों में गुस्सा

नेपाली हाथियों ने फसलें रौंदकर झोपड़ी तोड़ी, ग्रामीणों में गुस्सा
ग्रामीणों ने शोर मचाकर और पटाखे दगाकर बमुश्किल हाथियों को भगाया
पीलीभीत। बरसात के बाद जंगली जानवर किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहें हैं। रात में पहुंचे नेपाली हाथियों ने धान और सोयाबीन की फसल को जमकर नुकसान पहुंचाया। इसके बाद किसानों की झोपड़ी भी तोड़ डाली। आहट पर रखवाली कर रहे ग्रामीणों ने शोर मचाया। इसके बावजूद हाथी नहीं भागे। एकजुट हुए लोगों ने पटाखे और ढोल बजाकर बमुश्किल उन्हें भगाया। सूचना के बावजूद वन विभाग का कोई जिम्मेदार मौके पर नहीं पहुंचा। इससे लोगों में नाराजगी देखी जा रही है। रेंजर तीन टीमों द्वारा निगरानी का दावा कर रहे हैं।
कलीनगर और पूरनपुर के कई गांव नेपाल सीमा से सटे हुए हैं। खुला बॉर्डर होने पर यहां नेपाली हाथियों का अक्सर आना-जाना लगा रहता है। पहले बरसात ने किसानों पर जमकर कहर पाया। अब नेपाली हाथी उनकी मेहनत को पैरों से कुचल रहे हैं। कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव मैनी गुलरिया सहित अन्य गांव के लोगों को कटकवारा में पट्टे की जमीन मिली है। यहां किसान खेतों में झोपड़ी डालकर फसल की रखवाली करते हैं। मंगलवार रात नेपाली हाथियों ने जमकर तांडव मचाया। गांव के रहने वाले सुभाष, पटराम सहित कई किसानों की धान और सोयाबीन की फसल रौंद कर तहस नहस कर दी। इसके बाद झोपड़ी भी तोड़ दी। ग्रामीणों ने भागकर जान बचाई। जानकारी पर खेतों की रखवाली कर रहे किसान उन्हें भागने पहुंचे। बमुश्किल एक जुट हुए ग्रामीणों ने हाथियों को खेतों से दौड़ाया। सुबह जानकारी लगने के बावजूद कोई भी जिम्मेदार अफसर मौके पर नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। सिमरा ताल्लुके महाराजपुर के ग्राम प्रधान पति गुरदयाल सिंह ने बताया तीन दिन पहले तीन हाथी मैनी गुलड़िया से नदी किनारे होकर आ गए थे। तब से लगातार फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने वन विभाग से हाथियों को वापस भेजने की मांग की है।
————-
हाथियों के आने की सूचना मिली है। तीन टीमें निगरानी कर रही हैं। जिन किसानों का नुकसान हुआ है। वह कार्यालय आकर संबंधित जमीन की दस्तावेज सहित एक प्रार्थना पत्र दे दें। इसके बाद तहसील से जांच कराकर उन्हें मुआवजा दिलाया जाएगा।
अरुण मोहन श्रीवास्तव
रेंजर बराही




