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गोमती उद्गम स्थल पर नौकुंडीय गायत्री महायज्ञ की तैयारी शुरू, विशेष गोष्ठी संपन्न

गोमती उद्गम स्थल पर नौकुंडीय गायत्री महायज्ञ की तैयारी शुरू, विशेष गोष्ठी संपन्न

पूरनपुर,पीलीभीत।आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक उत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गुरुवार 11 सितंबर 2025 को अपराह्न 12 बजे मां गोमती उद्गम स्थल स्थित सामुदायिक हाल में एक विशेष गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी का मुख्य विषय आगामी नौकुंडीय गायत्री महायज्ञ रहा,जिसकी तैयारी को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।इस अवसर पर माता भगवती देवी शर्मा गौशाला, प्रसादपुर से पधारे वरिष्ठ गायत्री परिजन विशेष रूप से उपस्थित रहे।उन्होंने यज्ञ आयोजन के संबंध में सभी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और कहा कि नौकुंडीय महायज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और सद्भाव का संदेश फैलाने का माध्यम है।गोष्ठी में यह निर्णय लिया गया कि आगामी 21 सितंबर 2025 को एक भव्य मोटरसाइकिल प्रचार यात्रा निकाली जाएगी।इस यात्रा का उद्देश्य आसपास के गांवों और कस्बों में व्यापक प्रचार करना और अधिक से अधिक लोगों को महायज्ञ से जोड़ना होगा।मोटर साइकिल यात्रा के दौरान गांव-गांव जाकर लोगों को यज्ञ के महत्व और उसके आध्यात्मिक एवं सामाजिक लाभ बताए जाएंगे।गोष्ठी में यह भी तय किया गया कि 25 सितंबर 2025 को इसी स्थान पर एक और अत्यंत महत्वपूर्ण गोष्ठी आयोजित की जाएगी, जिसमें यज्ञ की अंतिम तैयारियों की समीक्षा की जाएगी।इसमें सभी कार्यकर्ताओं, सेवाभावी लोगों और समाजसेवियों की उपस्थिति अनिवार्य मानी गई है।
वरिष्ठ गायत्री परिजन ने उपस्थित जनों से कहा गायत्री यज्ञ जीवन में शुद्धता, सद्भाव और जागृति का संचार करता है।नौकुंडीय यज्ञ का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं,बल्कि समाज के हर वर्ग तक सकारात्मक संदेश पहुँचाना है। हम सबका कर्तव्य है कि अधिक से अधिक लोगों को इसमें जोड़कर इसे सफल बनाएं।उन्होंने आगे बताया कि इस महायज्ञ से न केवल धार्मिक वातावरण निर्मित होगा, बल्कि समाज में नैतिकता,संस्कार और सामूहिक सहयोग की भावना भी मजबूत होगी।गोष्ठी में बड़ी संख्या में गायत्री परिवार के कार्यकर्ता, श्रद्धालु और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने आगामी महायज्ञ की सफलता के लिए तन-मन-धन से सहयोग करने का संकल्प लिया।इस महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य समाज को आपसी भाईचारे से जोड़ना, युवाओं को संस्कारों से संपन्न करना और परिवारों में सद्भाव का वातावरण निर्मित करना बताया गया। उपस्थित वक्ताओं ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक अवसर करार दिया।

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