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शारदा नदी ने तेज किया भू कटान, बेबस ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन कर राहत बचाव कार्य तेज गति से कराने की लगाई गुहार

शारदा नदी ने तेज किया भू कटान, बेबस ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन कर राहत बचाव कार्य तेज गति से कराने की लगाई गुहार

रणजीत सिंह हजारा

हजारा,पीलीभीत।ट्रांस शारदा क्षेत्र में शारदा नदी ने भू कटान करने का सिलसिला फिर से शुरू कर दिया है। चंद दिनों में कई किसानों की जमीन फसलों समेत शारदा नदी की भेंट चढ़ चुकी है। और वहीं राहत बचाव कार्य कराने को लेकर पीड़ित ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन कर राहत बचाव कार्य शुरू कराने की मांग की है।पीलीभीत जनपद की पूरनपुर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ट्रांस शारदा क्षेत्र में हजारा फार्म, हजारा ग्राम, भरजूनियां फार्म तथा सिद्धनगर गांवों के सामने शारदा नदी ने वर्षों बाद फिर से भू कटान करने का सिलसिला शुरू कर दिया है। शारदा नदी कहर बरपाती हुई किसानों की कृषि योग्य भूमि को फसलों समेत लील रही है। जिससे ग्रामीणों में हाहाकार मचा हुआ है। यहां आपको बता दें कि यह शारदा नदी 1990 से भू कटान करती हुई चली आ रही है। जबकि सरकारों द्वारा राहत बचाव कार्य करने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किये जा चुके हैं वो भी बिना किसी ठोस योजना के। परिणामस्वरूप जिसका नतीजा शून्य रहा। अभी तक ट्रांस शारदा क्षेत्रवासीयों का भू कटान से पीछा नहीं छूटा। यहां आपको बता दें कि सन् 1990 से कई सरकारें आईं और गईं पर किसी भी सरकार नें ट्रांस शारदा क्षेत्रवासियों को भू कटान जैसी गंभीर समस्या से छुटकारा नहीं दिलाया। या ये कहें कि सही मायनों में छुटकारा दिलाने की कोशिश ही नहीं की गई। सन् 1990 से लेकर अब तक हजारों एकड़ कृषि योग्य भूमि, वन विभाग की भूमि एंव दर्जनों गांव प्राणदायिनी कही जाने वाली शारदा नदी की लहरों में समाहित हो गये हैं।वहीं वर्षों बाद हजारा ग्राम, हजारा फार्म तथा भरजूनियां फार्म के ग्रामीणों को शारदा नदी द्वारा भू कटान करने के दिये गए जख्म फिर से हरे हो गये हैं। सन् 1992 – 93 में शारदा नदी द्वारा हुई भंयकर भू कटान करने का समय याद कर आज भी ग्रामीणों की रुह कांप जा रही है। यहां आपको बता दें कि सन् 1992 – 93 में शारदा नदी हजारा फार्म तथा हजारा ग्राम को भू कटान कर नेस्तनाबूद कर चूकी है। कई सालों तक भू कटान सैंकड़ों परिवारों ने खानाबदोश जैसी जिंदगी जी थी। अभी मुश्किल से भू कटान पीड़ितों की गृहस्थी पटरी पर आ ही रही थी कि दोबारा फिर से भू कटान का दंश झेलना पड़ रहा है। क्योंकि दोबारा लगभग तीस साल बाद फिर से शारदा नदी भू कटान करती हुई कृषि योग्य भूमि को लहलहाती फसलों समेत अपनी आगोश में लेती हुई हजारा ग्राम, शास्त्रीनगर व भरजूनियां फार्म की तरफ बढ़ रही है। शारदा नदी द्वारा हो रही भू कटान की रफ्तार को देखते हुए ग्रामीणों में हडकंप मचा हुआ है। चंद दिनों में ही शारदा नदी ने हजारा ग्राम के लगभग एक दर्जन किसानों की 15 – 20 एकड़ भूमि को फसलों समेत लील लिया है। वहीं भू कटान की इस विभीषिका को देख कर शुक्रवार को भू कटान पीड़ितों ने मौके पर जाकर शारदा नदी के किनारे एकत्र होकर शासन प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर तत्काल राहत बचाव कार्य शुरू कराये जाने की मांग की है। यहां हम स्पष्ट कर दें की अगर समय रहते शारदा नदी द्वारा होने वाली भू कटान को रोकने को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये तो शारदा नदी के मुहाने पर बसे गांव भू कटान की जद में आ जायेंगे। जिससे ग्रामीणों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। विरोध प्रदर्शन करने वालों में मुख्य रूप से मौके पर राकेश यादव, रामचंद्र, परमात्मा नन्द, काशीराम, धनीराम, रामभरोसे, रमेश, राजेश यादव, रामऔतार, दीपक, भरत, आदित्य समेत काफी संख्या में कटान पीड़ित किसान मौजूद रहे।

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