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शारदा नदी को समर्पित रखे गए दो श्री अखंडपाठ साहिबों का पड़ा भोग

15 दिन से चल रहे नाम सिमरन की भी हुई समाप्ति

शारदा नदी को समर्पित रखे गए दो श्री अखंडपाठ साहिबों का पड़ा भोग,

15 दिन से चल रहे नाम सिमरन की भी हुई समाप्ति

(संवाददाता:रणजीत सिंह भिंडर हजारा)

हजारा ,पीलीभीत। पीलीभीत जनपद के ट्रांस शारदा क्षेत्र में स्थित एतिहासिक गुरुद्वारा नानक साहिब खजूरिया सिद्धनगर में शारदा नदी द्वारा होने वाली भू कटान से बचाव के लिए मनोकामना पूरी होने पर ग्रामीणों के द्वारा दो श्री अखंडपाठ साहिबों का आयोजन किया गया था। एक श्रीअखंडपाठ साहिब भरजूनियां, भरतपुर, शास्त्रीनगर व सिद्धनगर तथा दूसरा श्रीअखंडपाठ साहिब कमलापुर, टिब्बा, पैड़िया, खजूरिया की संगत के द्वारा कराया गया था।
शारदा नदी को समर्पित गुरुवार से प्रारंभ किये गए दोनों श्रीअखंडपाठ साहिबों का समापन शनिवार को गुरुद्वारा साहिब के मुख्य ग्रंथी बाबा निशान सिंह के द्वारा अरदास करने पश्चात हुआ। इस अवसर पर आसपास के गांवों से काफी संख्या में पहुंची संगत ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सामने मत्था टेक कर सुख शांति की कामना कर प्रसाद ग्रहण किया।
यहां आपको बता दें कि लगभग तीस साल पहले ट्रांस शारदा क्षेत्र में शारदा नदी ने भू कटान कर भंयकर तबाही मचाई थी। दर्जनों गांवों का वजूद खत्म कर दिया था। भू कटान से पूरे ट्रांस शारदा क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ था। गांवों के गांव शारदा नदी में समाते देख लोगों का कलेजा मुंह को आ रहा था। वहीं शारदा नदी लगातार भू कटान करती हुई भरजूनियां, सिद्धनगर, नेहरु नगर, बहादुर नगर समेत कई गांवों को निगलने को व्याकुल हो रही थी। ठीक उसी दौरान सन् 1997 में गुरुद्वारा नानक साहिब खजूरिया सिद्धनगर के संस्थापक सचखंडवासी संत बाबा सुल्खन सिंह शारदा नदी द्वारा हो रही भू कटान को देखने के लिए क्षेत्र में गए थे। वापस गुरुद्वारा साहिब में आकर उन्होंने वहां मौजूद संगत से शारदा नदी को समर्पित श्री अखंडपाठ साहिब कराने के लिए कहा। वहीं ग्रामीणों ने इन बचनों पर अमल करते हुए रक्षाबंधन के त्योहार के अवसर पर श्री अखंडपाठ साहिब कराये जाने की आपस में सहमति बनाई थी। जब से संगत ने यह प्रक्रिया शुरू की तो उसी समय से शारदा नदी भू कटान छोड़ कर वापस पुरानी जगह पर चली गई थी। इसी के मद्देनजर संगत हर साल रक्षाबंधन के त्योहार पर शारदा नदी को समर्पित श्रीअखंडपाठ साहिब का आयोजन करती चली आ रही है। इसके अलावा गुरुद्वारा साहिब के मुख्य जत्थेदार संत बाबा दिलबाग सिंह के बचनों के अनुसार संगत ने गुरूद्वारा परिसर में शारदा नदी को समर्पित 15 दिनों तक लगातार सतनाम श्री वाहे गुरु जी का जाप करना शुरू किया था। जिसकी समाप्ति भी शारदा नदी को समर्पित रखे गए श्रीअखंडपाठ साहिब के समापन के साथ ही नाम सिमरन की समाप्ति करने का समय तय किया गया था।वहीं मन्नत पूरी होने पर क्षेत्र की संगत के द्वारा हर साल यह कार्यक्रम पूरी आस्था तथा श्रद्धापूर्वक किया जाने लगा। यहां आपको बता दें कि संगत ने गर्मी व बारिश की परवाह किए बगैर लगातार 15 दिनों तक गुरुद्वारा साहिब में पहुंच कर नाम सिमरन में हिस्सा लिया। इस दौरान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से लंगर की विशेष व्यवस्था की जाती रही थी। इस दौरान मौके पर जत्थेदार बाबा दीपा सिंह, गुरुद्वारा साहिब के प्रधान रणजीत सिंह, उप प्रधान महेंद्र सिंह, मैनेजर निशान सिंह व सतनाम सिंह फौजी, स्टेज सेक्रेटरी सतनाम सिंह, पूर्व उप प्रधान दलबीर सिंह व निशान सिंह, दरबारा सिंह, पूर्व ग्राम प्रधान अमरीक सिंह, गुरदीप सिंह, सतनाम सिंह, प्रताप सिंह, जसपाल सिंह, मंगजीत सिंह, रणजीत सिंह डेरा, जगीर सिंह समेत तमाम सेवादार मौजूद रहे।

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