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व्यापार मण्डल और अधिवक्ता संघ ने अमेरिकी उत्पादों का किया विरोध प्रदर्शन कर किया बहिष्कार

व्यापार मण्डल और अधिवक्ता संघ ने अमेरिकी उत्पादों का किया विरोध प्रदर्शन कर किया बहिष्कार

पूरनपुर।उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल और अधिवक्ता संघ ने विरोध प्रदर्शन कर अमेरिकी उत्पादों का बायकॉट करने का कहा वही हंसराज गुलाटी ने अमेरिका के राष्ट्रपति को लताड़ाते हुऐ कहा डोनल्ड ट्रंप ने अगर ये टैरिफ वापस नही लिया तो उनके विदेशी उत्पाद भी भारत मे बिकने नही देंगे पूरे भारत से बायकॉट कर देंगे और उनकी भी भारी खामिजयाना भुगतना पड़ सकता और सारे उत्पादों का पूर्णता बहिष्कार करेंगे सभी ने मुर्दाबाद के नारे लगाते हुऐ कहा डोनल्ड ट्रंप खुद तो रूसी उत्पादों का उपयोग करता और भारत पर रोब जमाना चाहता है डोनल्ड सुन ले भारत किसी से कमजोर नही भारत पर गुंडागर्दी नहीं चलेगी डोनाल्ड ट्रंप होश मे आ और कहा कि एकतरफा टैरिफ लगाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल खरीदने की वजह से भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाया गया है अमेरिका के इस कदम से भारतीय निर्यातक, विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योग प्रभावित हो सकते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने भारत पर कुल 50 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा है अब भारत के पास क्या विकल्प है, ये हर कोई जानना चाहता है. ट्रंप के टैरिफ के जवाब में भारत का भी बयान आ गया है, भारत ने कुल 50 फीसदी टैरिफ को अनुचित कदम बताया है साथ ही भारत का कहना है कि अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे भारत के पास कूटनीतिक वार्ता, ऊर्जा आयात विविधीकरण, जवाबी टैरिफ और घरेलू आर्थिक उपायों का विकल्प है आपको बता दूं, अमेरिका ने जो भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाया है, वो 21 दिन के बाद लागू होगा यानी भारत के पास अभी 21 दिन का वक्त है और इस दौरान दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिये कोई रास्ता निकल सकता फिलहाल भारत अपनी तेल आवश्यकताओं का करीब 85% आयात करता है, वर्तमान में रूस से करीब 40% तेल आयात करता है. अमेरिका की नाराजगी दूर करने के लिए भारत सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और नाइजीरिया जैसे अन्य तेल निर्यातक देशों से आयात बढ़ा सकता है. हालांकि, रूसी तेल की तुलना में ये विकल्प महंगे हो सकते हैं, जिससे लागत बढ़ सकती है
भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO) जैसे मंचों पर इस मुद्दे को उठा सकता है, यह तर्क देते हुए कि टैरिफ भेदभावपूर्ण है और WTO के सिद्धांतों (most-favored-nation treatment) का सीधा उल्लंघन करता है. भारत G20 या BRICS जैसे मंचों पर भी समर्थन जुटा सकता है. भारत BRICS, SCO और अन्य क्षेत्रीय मंचों के माध्यम से रूस, चीन, और अन्य सहयोगियों के साथ संबंधों को मजबूत कर सकता है ताकि टैरिफ के प्रभाव को संतुलित किया जाए
अमेरिका के नहीं मानने पर भारत भारत दक्षिण अमेरिका (जैसे वेनेजुएला) या अफ्रीका के अन्य देशों से तेल आयात के नए स्रोत तलाश कर सकता है हालांकि यह लॉजिस्टिक्स और लागत के मामले में चुनौतीपूर्ण हो सकता है. भारत नवीकरणीय ऊर्जा (सौर, पवन) और घरेलू तेल व गैस उत्पादन को बढ़ावा दे सकता है अगर बातचीत से रास्ता नहीं निकलता है तो भारत भी पलटवार कर सकता है उदाहरण के लिए भारत पहले 2019 में अमेरिकी बादाम, सेब, और स्टील पर टैरिफ लगा चुका है अमेरिका टैरिफ से प्रभावित भारत अपने घरेलू उद्योगों (जैसे टेक्सटाइल, फार्मा, और आईटी) को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी या प्रोत्साहन दे सकता है. ताकि टैरिफ के प्रभाव को कम किया जाए भारत निर्यात के लिए अमेरिकी बाजार का विकल्प तलाश कर सकता है भारत का अमेरिका के साथ व्यापार घाटा 2024 में 45.8 अरब डॉलर था, और टैरिफ से यह और बढ़ सकता है विरोध करने वालो मे प्रदेश उपाध्यक्ष हंसराज गुलाटी, नगर पालिका अध्यक्ष शैलेन्द्र गुप्ता,अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष संजय सक्सेना, सर्राफा संघ अध्यक्ष संजय गुप्ता, वरिष्ठ समाजसेवी अशोक खंडेलवाल,जाहिद खान, नवीन खंडेलवाल, विजय पाल सिंह विक्की, दीपक अग्रवाल, संजय पाण्डेय, हरगोविंद बाजपेई, तारिक कुरैशी, ब्रजेश गुप्ता, सुमित सचदेवा, सुरेन्द्र अग्रवाल, संजीव गुप्ता, राहुल जायसवाल, अनुज गुप्ता, बलजीत सिंह खैरा, अमन नागी, मनोज गुप्ता सोना, सुधाकर पाण्डेय, शाहजी खान, सलमान खान, हर्ष गुप्ता कपिल जायसवाल, सुशील सक्सेना, सचिन, आशीष रस्तोगी, राजेश गुप्ता, ब्रज खंडेलवाल सहित कई लोग मौजूद रहे

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