हजारा के बच्चों ने अखबार पढ़कर बढ़ाया ज्ञान, देश-दुनिया की खबरों से हुए रूबरू
समाचारों से मिली सीख, अब अखबार बन रहा बच्चों का नया शिक्षक

हजारा के बच्चों ने अखबार पढ़कर बढ़ाया ज्ञान, देश-दुनिया की खबरों से हुए रूबरू
समाचारों से मिली सीख, अब अखबार बन रहा बच्चों का नया शिक्षक
पूरनपुर,पीलीभीत।शिक्षा के क्षेत्र में नई पहल के अंतर्गत अब सरकारी विद्यालयों में भी बच्चों को देश-दुनिया की जानकारी देने के प्रयास हो रहे हैं। ऐसा ही एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है पूरनपुर विकासखंड के ग्राम चंदिया हजारा बंगाली कॉलोनी स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय से, जहां विद्यार्थियों ने समाचार पत्र पढ़कर न केवल क्षेत्रीय घटनाओं की जानकारी प्राप्त की, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घट रही घटनाओं से भी अवगत हुए।यह गतिविधि जिलाधिकारी पीलीभीत द्वारा दिए गए निर्देशों के अनुपालन में चलाई जा रही “रीडिंग न्यूजपेपर” पहल का हिस्सा है। इस पहल के तहत जिले के प्रत्येक विद्यालय में बच्चों को समाचार पत्र पढ़ने के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि वे पाठ्यपुस्तकों के अतिरिक्त भी जानकारी प्राप्त कर सकें और समाचारों को समझने की आदत विकसित कर सकें।विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने इस दिशा में पहल करते हुए छात्रों को नियमित रूप से समाचार पत्र उपलब्ध कराए। बच्चों ने उत्साहपूर्वक समाचार पढ़े और विभिन्न विषयों जैसे – स्थानीय विकास, मौसम, खेल, विज्ञान, शिक्षा, राजनीति और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं के बारे में जाना। इससे उनकी सामान्य ज्ञान की समझ में भी इजाफा हुआ।विद्यालय में इंचार्ज अध्यापक जितेंद्र कुमार, सहायक अध्यापक धर्मेंद्र प्रसाद दिवाकर और अनुसूचित जाति वर्ग के सहायक अध्यापक अभिषेक यादव द्वारा छात्रों को समाचार पढ़ने के लिए प्रेरित किया गया। इन शिक्षकों ने बच्चों को यह भी बताया कि समाचार पढ़ना केवल जानकारी के लिए ही नहीं, बल्कि भाषा, व्याकरण, शब्दावली और सोचने की क्षमता को भी बेहतर बनाता है।शिक्षकों ने कहा कि समाचार पत्र पढ़ना विद्यार्थियों को सक्रिय पाठक बनाता है और यह आदत आगे चलकर उनके व्यक्तित्व निर्माण में अहम भूमिका निभाती है। बच्चों ने भी अपनी उत्सुकता व्यक्त की और कहा कि अखबार पढ़ने से उन्हें बहुत कुछ नया सीखने को मिला।विद्यालय में हुई इस गतिविधि से यह स्पष्ट होता है कि यदि विद्यालय स्तर पर प्रयास किए जाएं तो बच्चों की बौद्धिक क्षमता और सामाजिक जागरूकता को नई दिशा दी जा सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस तरह की शैक्षिक पहलें बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो रही हैं।




