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पंचायत चुनाव की सुगबुगाहट तेज, कार्यकाल समाप्ति से पहले ‘फंड साफ’ करने की होड़

हेडपम्प रिबोर और सफाई के नाम पर खर्च दिखाकर निकाला गया सरकारी धन, जांच की मांग तेज

सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र की पंचायतों में तैनात एक सचिव पर भ्र्ष्टाचार का आरोप, प्रधानों की मिलीभगत से लाखों लगाएं ठिकाने 

पंचायत चुनाव नजदीक आते ही जनपद की कई ग्राम पंचायतों में सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सामने आने लगे हैं। कार्यकाल समाप्ति से पहले ही प्रधान और सचिवों पर तेजी से बजट खर्च करने और फर्जी तरीके से धनराशि निकालने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। पंचायतों में साफ-सफाई, हेडपम्प रिबोर, फॉगिंग, कम्प्यूटर मरम्मत समेत अन्य कार्यों के नाम फर्जी तरीके से सरकारी धनराशि निकालकर बड़ा घोटाला किया गया है। जानकारी के अनुसार पूरनपुर ब्लॉक के सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र की कुछ पंचायतें इस समय चर्चा में हैं, जहां तैनात एक सचिव पर भ्र्ष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।ग्रामीणों का आरोप है सचिव नें प्रधानों की मिलीभगत से विकास कार्यों के नाम पर बड़े पैमाने पर सरकारी धनराशि का दुरुपयोग किया गया है। खासकर हेडपम्प रिबोर, साफ-सफाई और अन्य निर्माण कार्यों के नाम पर कागजों में भारी खर्च दिखाया गया, जबकि धरातल पर ऐसे कार्य या तो अधूरे हैं या फिर कराए ही नहीं गए।सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि भुगतान से जुड़े दस्तावेजों में हेराफेरी कर एक ही व्यक्ति के खाते में अलग-अलग कार्यों के लिए दर्शाया गया। कभी उसी को हेडपम्प मिस्त्री दिखाया गया, तो कभी राजमिस्त्री और कभी सफाईकर्मी के रूप में भुगतान दर्शाया गया। इससे यह आशंका और गहरा गई है कि योजनाबद्ध तरीके से फर्जी भुगतान कर सरकारी धन को ठिकाने लगाया गया।ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि एक ही बैंक खाते में विभिन्न कार्यों के नाम पर लाखों रुपये ट्रांसफर किए गए। जबकि वास्तविकता में उन कार्यों का अस्तित्व ही नहीं है। इस तरह की कार्यप्रणाली से न केवल सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है, बल्कि योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है हेडपम्प रिबोर के नाम पर कई बार हजारों रूपये की धनराशि निकाली गई है। इसी प्रकार साफ-सफाई के नाम पर नियमित खर्च दिखाया गया, जबकि गांवों में गंदगी की स्थिति जस की तस बनी हुई है।सूत्रों के मुताबिक, कार्यकाल के अंतिम दौर में बजट को जल्द से जल्द खपाने का दबाव रहता है, जिसका फायदा उठाकर इस तरह की अनियमितताओं को अंजाम दिया जाता है। कागजों में विकास कार्यों की तस्वीर चमकदार बनाई जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर वास्तविकता बिल्कुल अलग होती है।ग्रामीणों में इस पूरे मामले को लेकर भारी नाराजगी है। उन्होंने उच्चाधिकारियों से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह प्रवृत्ति आगे भी जारी रहेगी और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा।वहीं, संबंधित अधिकारियों का कहना है कि यदि इस प्रकार की कोई शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जांच में अनियमितता पाए जाने पर संबंधित प्रधान और सचिव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पंचायत चुनाव से पहले सामने आए इन आरोपों ने एक बार फिर ग्राम पंचायतों में वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबकी नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी है, जिससे सच्चाई सामने आ सके।

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