पीलीभीत भाजपा में बड़ा बदलाव: गोकुल प्रसाद मौर्य बने जिलाध्यक्ष, 2027 की रणनीति शुरू

पीलीभीत भाजपा में बड़ा बदलाव: गोकुल प्रसाद मौर्य बने जिलाध्यक्ष, 2027 की रणनीति शुरू
पीलीभीत। संगठन में लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए भारतीय जनता पार्टी ने आखिरकार जिले की कमान नए चेहरे को सौंप दी है। पार्टी नेतृत्व ने गोकुल प्रसाद मौर्य को पीलीभीत का नया जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। करीब छह वर्षों तक संगठन का नेतृत्व करने वाले संजीव प्रताप सिंह के कार्यकाल के बाद यह बदलाव जिले की राजनीतिक हलचल को तेज करने वाला माना जा रहा है। गोकुल प्रसाद मौर्य नगर पालिका परिषद पीलीभीत में सभासद के रूप में सक्रिय रहे हैं। मोहल्ला नई बस्ती निवासी मौर्य को संगठन में जमीनी कार्यकर्ता के रूप में पहचान मिली है। सौम्य स्वभाव और विभिन्न सामाजिक वर्गों में पकड़ के चलते पार्टी नेतृत्व ने उन पर भरोसा जताया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह नियुक्ति वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर की गई रणनीतिक चाल है। निकाय चुनाव के दौरान भी मौर्य का नाम चर्चाओं में रहा था। उन्होंने अपनी पत्नी के लिए पार्टी से टिकट मांगा था। टिकट फाइनल न होने पर निर्दलीय नामांकन भी दाखिल किया, लेकिन बाद में शीर्ष नेतृत्व के समझाने पर नामांकन वापस ले लिया। इस घटनाक्रम के बाद भी उन्होंने संगठन के प्रति निष्ठा बनाए रखी, जिसे अब जिम्मेदारी के रूप में देखा जा रहा है। नए जिलाध्यक्ष को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का करीबी माना जाता है। ऐसे में जिले में मौर्य बिरादरी को साधने और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है। नई जिम्मेदारी मिलने के बाद समर्थकों में उत्साह का माहौल है। जगह-जगह मिष्ठान वितरण कर बधाइयां दी जा रही हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि नए नेतृत्व में संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी और आगामी चुनावी तैयारियां तेज होंगी। अब देखना होगा कि गोकुल प्रसाद मौर्य अपने संगठनात्मक कौशल से भाजपा को 2027 के चुनावी रण में कितनी मजबूती दिला पाते हैं। जिले की राजनीति में यह बदलाव आने वाले दिनों में कई नए समीकरण भी तय कर सकता है।




