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राज्यमंत्री और सपा जिलाध्यक्ष में सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग, ‘फेसबुकिया’ बनाम ‘पोस्ट ग्रेजुएट’ तंज

राज्यमंत्री और सपा जिलाध्यक्ष में सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग, ‘फेसबुकिया’ बनाम ‘पोस्ट ग्रेजुएट’ तंज

पीलीभीत। जिले की सियासत इन दिनों सोशल मीडिया पर गर्माई हुई है। सदर विधायक एवं गन्ना राज्यमंत्री संजय सिंह गंगवार और सपा जिला अध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा के बीच बयानबाजी ने राजनीतिक माहौल को तीखा कर दिया है। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर सीधे और कड़े आरोप लगाए हैं, जिससे समर्थकों के बीच भी बहस तेज हो गई है।शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार ने सपा जिलाध्यक्ष पर निशाना साधते हुए उन्हें “फेसबुकिया जिलाध्यक्ष” करार दिया। उन्होंने कहा उनके नेतृत्व में समाजवादी पार्टी कोई चुनाव नहीं जीत सकी है। मंत्री ने दावा किया कि भाजपा जिला अध्यक्ष के नेतृत्व में पार्टी ने कोई चुनाव नहीं हारा है और विपक्ष को संगठन से सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने आगे कहा इसलिए उनकी कार्य क्षमता पता चलती है। जनता को लूटने का काम किया है उत्तर प्रदेश को बीमारु राज्य बनाने का काम किया है। मंत्री के इस बयान के बाद सपा जिलाध्यक्ष जगदेव सिंह जग्गा ने सोशल मीडिया पर विस्तृत जवाब देते हुए पलटवार किया। उन्होंने लिखा कि मंत्री का बयान उनकी घबराहट और हताशा को दर्शाता है। जग्गा ने आरोप लगाया कि जब किसानों की बदहाली, युवाओं की बेरोजगारी, गिरती कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर जवाब नहीं होता, तब भाजपा नेता व्यक्तिगत टिप्पणियों का सहारा लेते हैं। जग्गा ने कहा कि यदि जनता की समस्याओं को सोशल मीडिया के माध्यम से उठाना “फेसबुकिया राजनीति” है, तो उन्हें इस पर गर्व है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि लोकतंत्र में चुनाव जीत जनता के विश्वास से होती है या सत्ता के प्रभाव से। साथ ही मंत्री पर संपत्तियों और जमीनों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और कहा कि जनता सब देख रही है।सपा जिलाध्यक्ष ने मंत्री के उस पुराने बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें कोतवाल को हटाने के लिए मुख्यमंत्री से मिलने की बात कही गई थी। उन्होंने पूछा कि उस मामले में क्या कार्रवाई हुई और जनता इसका जवाब चाहती है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद जिले की राजनीतिक फिजा गरमा गई है। जहां भाजपा इसे विपक्ष की बौखलाहट बता रही है, वहीं सपा इसे जनमुद्दों को उठाने की लड़ाई करार दे रही है। आने वाले दिनों में यह सियासी जंग और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। जनता की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि यह जुबानी जंग केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहती है या जमीनी राजनीति में भी इसका असर देखने को मिलता है।

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