ग्राम पंचायत सचिवों का विरोध छठे दिन भी जारी, काली पट्टी बांधकर किया कार्य
कई ग्राम पंचायतों का चार्ज होने से समय पर उपस्थिति दर्ज करना असंभव: अवनीश कुमार

ग्राम पंचायत सचिवों का विरोध छठे दिन भी जारी, काली पट्टी बांधकर किया कार्य
कई ग्राम पंचायतों का चार्ज होने से समय पर उपस्थिति दर्ज करना असंभव: अवनीश कुमार
मीनू बरकाती
पूरनपुर,पीलीभीत।विकासखंड पूरनपुर के ग्राम पंचायत सचिवों का विरोध आंदोलन सोमवार को छठे दिन भी जारी रहा। अपनी मांगों के समर्थन में सभी सचिव बाजू पर काली पट्टी बांधकर ब्लॉक कार्यालय पहुंचे और नियमित कार्य करते हुए शांतिपूर्ण ढंग से विरोध दर्ज कराया। सचिवों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक यह प्रतीकात्मक आंदोलन जारी रहेगा।सचिवों ने दोहराया कि ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को वर्तमान परिस्थितियों में लागू करना पूर्णतः अव्यवहारिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की कमी, तकनीकी संसाधनों का अभाव तथा कई ग्राम पंचायतों का एक साथ चार्ज होने के कारण उनके लिए ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करना असंभव हो जाता है। सचिवों का कहना है कि इन चुनौतियों के बावजूद ऑनलाइन उपस्थिति को अनिवार्य किया जाना जमीनी हकीकत की अनदेखी है।आंदोलनरत सचिवों ने यह भी कहा कि उन पर लगातार गैर विभागीय कार्यों का अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है, जिससे उनके नियमित विकास कार्य बाधित होते हैं। सचिवों ने स्पष्ट किया कि वे तकनीक या डिजिटल व्यवस्था के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना आवश्यक संसाधनों और सुविधाओं के ऐसी प्रणाली लागू करना कर्मचारियों के साथ अन्याय है।सचिवों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो 10 तारीख से निजी वाहन बंद कर दिए जाएंगे और 15 तारीख को सभी सचिव डोंगल जमा कर देंगे। कई सचिव पहले ही सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ चुके हैं। उनका कहना है कि समस्याओं का समाधान किए बिना इस प्रकार की व्यवस्थाएं लागू करना उचित नहीं है।पांचवें दिन भी विरोध में बड़ी संख्या में सचिव शामिल रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि सरकार व विभागीय अधिकारी उनकी वास्तविक कार्य स्थितियों को समझते हुए ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था पर पुनर्विचार करें।ग्रामीणों ने भी सचिवों के अनुशासित और शांतिपूर्ण विरोध का समर्थन किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सचिव गांवों के विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं, और उन पर अनावश्यक दबाव बढ़ने से विकास कार्यों की गति प्रभावित होती है।सचिवों ने शासन से आग्रह किया है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनकर जल्द ही समाधान निकाला जाए। फिलहाल आंदोलन शांतिपूर्ण है, लेकिन सचिवों में बढ़ती नाराजगी आने वाले दिनों में विरोध को और तेज करने का संकेत दे रही है।




