फाइलों से फील्ड तक: डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने बदली पीलीभीत की कार्यशैली, काम नही तो नहीं बचेगी कुर्सी

फाइलों से फील्ड तक: डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने बदली पीलीभीत की कार्यशैली, काम नही तो नहीं बचेगी कुर्सी
बिना शोर, बिना दिखावा सीधा एक्शन डीएम ज्ञानेंद्र सिंह की अलग पहचान
आज पीलीभीत कह रहा है अगर डीएम ऐसा हो,तो सिस्टम खुद लाइन पर आ जाता है
पीलीभीत।जब प्रशासन केवल आदेशों और फाइलों तक सीमित रह जाए, जब जनता की आवाज़ कागज़ों में दबकर रह जाए और व्यवस्था पर भरोसा टूटने लगे तब किसी ऐसे अफसर की ज़रूरत होती है जो सिस्टम का हिस्सा बनकर नहीं, बल्कि सिस्टम को सही दिशा देने वाला नेतृत्व बनकर खड़ा हो। पीलीभीत के जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह ने यही कर दिखाया है। मई 2025 से जिले की कमान संभालते ही उन्होंने साफ कर दिया कि अब दिखावटी प्रशासन नहीं, बल्कि काम से बोलने वाला प्रशासन चलेगा।डीएम ज्ञानेंद्र सिंह की पहचान ईमानदारी, ज़मीन से जुड़ी कार्यशैली, सख़्त मॉनिटरिंग और शून्य-टॉलरेंस व्यवस्था से बन चुकी है। उन्होंने सबसे पहले उस जनसुनवाई प्रणाली को निशाने पर लिया, जिसे वर्षों से खानापूर्ति और झूठे 100 प्रतिशत निस्तारण के लिए बदनाम किया जाता रहा था। शिकायतें दर्ज तो होती थीं, लेकिन समाधान ज़मीन पर नहीं दिखता था। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने इस पूरी व्यवस्था को उलटकर रख दिया। अब शिकायतें केवल सुनी नहीं जातीं, बल्कि सबूतों के आधार पर कार्रवाई, कड़े फॉलो-अप और मौके पर जाकर सत्यापन किया जाता है। इसी का नतीजा रहा कि पीलीभीत ने पूरे प्रदेश में जनसुनवाई में पहला स्थान हासिल कर लिया।यह उपलब्धि महज़ आँकड़ा नहीं, बल्कि उस सोच के खिलाफ एक सख़्त संदेश है जो जनता को केवल रिपोर्ट का हिस्सा समझती थी। डीएम ज्ञानेंद्र सिंह ने यह साबित किया कि यदि प्रशासन ईमानदारी से काम करे, तो जनता का भरोसा वापस लाया जा सकता है। उनकी कार्यशैली से भ्रष्ट और लापरवाह कर्मचारियों में साफ संदेश गया है अब लापरवाही और भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं। त्वरित और स्पष्ट कार्रवाई ने वर्षों से जमी जड़ता को तोड़ दिया है।डीएम ज्ञानेंद्र सिंह की सबसे बड़ी ताकत है उनका फील्ड-बेस्ड प्रशासन। वे बिना दिखावे और बिना अनावश्यक प्रोटोकॉल के आम जनता के बीच पहुँचते हैं, उनकी समस्याएँ सुनते हैं और मौके पर ही समाधान की दिशा तय करते हैं। यही कारण है कि आज पीलीभीत की जनता यह महसूस कर रही है कि जिला प्रशासन केवल दफ़्तरों तक सीमित नहीं, बल्कि सीधे उनके बीच मौजूद है।विकास कार्यों की निगरानी हो या सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन डीएम ज्ञानेंद्र सिंह कागज़ी रिपोर्टों पर नहीं, बल्कि ज़मीनी हकीकत पर भरोसा करते हैं। रियल-टाइम मॉनिटरिंग ने अफसरशाही की सुस्ती पर लगाम लगाई है और विकास कार्यों की गति को तेज़ किया है। अब काम केवल फाइलों में नहीं, बल्कि सड़कों, स्कूलों और गांवों में दिखाई दे रहा है।लाइमलाइट से दूर रहकर, शोर से नहीं बल्कि काम की धमक से पहचान बनाने वाले ज्ञानेंद्र सिंह उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल हैं, जो व्यवस्था की सीमाओं को बहाना नहीं बनाते, बल्कि उसी व्यवस्था को अपने संकल्प और मेहनत से बेहतर बनाते हैं। पीलीभीत जैसे जिले में जनसुनवाई को जीवंत बनाना, जनता का भरोसा मज़बूत करना और प्रशासन को जवाबदेह बनाना यह उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी सफलता है।आज पीलीभीत में एक बात साफ कही जा रही है जब डीएम ज्ञानेंद्र सिंह जैसे अफसर हों, तो सिस्टम खुद अनुशासन में आ जाता है।आज पीलीभीत कह रहा है अगर डीएम ऐसा हो, तो सिस्टम खुद लाइन पर आ जाता है।




