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धान खरीद के नाम पर कागजी खेती,असली किसान बेबस

धान खरीद के नाम पर कागजी खेती,असली किसान बेबस

खरीद केंद्रों पर फर्जी एंट्री, मिलरों की भर रही तिजोरी

अंगूठा गैंग का खेल उजागर, पूरनपुर मंडी में फर्जीवाड़े का फुल सिस्टम बेनकाब

पीलीभीत।सरकारी धान खरीद व्यवस्था की सच्चाई पूरनपुर मंडी में उस समय कटघरे में आ गई, जब यहां वास्तविक धान की जगह कागजों में खरीद पूरी दिखाने का मामला सामने आया। मंडी में न तो किसानों की फसल नजर आ रही है और न ही तौल प्रक्रिया हो रही है, इसके बावजूद सरकारी अभिलेखों में हजारों कुंतल धान की खरीद दर्ज की जा रही है। यह पूरा खेल एजेंसी केंद्र प्रभारियों और राइस मिलरों की कथित मिलीभगत से संचालित होने की चर्चा है।
सूत्रों के अनुसार, खरीद केंद्रों पर किसान की जगह बाहरी लोगों से अंगूठा लगवाकर धान खरीद दर्शा दी जाती है। न मंडी में धान का ढेर लगता है और न ही उठान की प्रक्रिया दिखाई देती है, लेकिन रिकॉर्ड में सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी जाती हैं। इस प्रक्रिया से वास्तविक किसानों को अपनी उपज बेचने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, जबकि कागजों में उनके नाम पर खरीद दिखाकर लाभ मिलरों तक पहुंचाया जा रहा है।इस कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें किसानों के नाम पर अंगूठा लगवाने की प्रक्रिया साफ दिखाई दे रही है।वीडियो सामने आने के बाद सरकारी खरीद प्रणाली की निगरानी और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि बिना धान आए ही खरीद दर्ज हो रही है, तो यह व्यवस्था में गहरी सेंध का संकेत है।बताया जा रहा है कि इस तरह की फर्जी खरीद से न केवल किसानों के हक पर असर पड़ रहा है, बल्कि सरकारी खजाने को भी सीधा नुकसान हो रहा है। शासन द्वारा किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई व्यवस्था को कुछ लोग निजी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं। मंडी में वास्तविक खरीद न होने के कारण किसानों को बार-बार भटकना पड़ रहा है।सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने गंभीर आरोप और वीडियो सामने आने के बावजूद अब तक किसी भी एजेंसी, केंद्र प्रभारी या राइस मिलर के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जिला प्रशासन की चुप्पी को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ रही है। आम लोगों और किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सख्त जांच और कार्रवाई नहीं हुई, तो सरकारी खरीद व्यवस्था पर से भरोसा पूरी तरह खत्म हो जाएगा।अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या पूरनपुर मंडी में चल रहे इस कथित फर्जी धान खरीद के खेल पर कोई प्रभावी कदम उठाया जाएगा, या फिर यह खेल कागजों में यूं ही चलता रहेगा

मंडी में न ढेर, न तौल, न उठान… लेकिन रिकॉर्ड में सब कुछ नियमों के मुताबिक!

खरीद केंद्रों पर बिना एक दाना आए ही धान की एंट्री हो जाती है। असली किसान मंडी के बाहर खड़े रह जाते हैं और कागजों में उनके नाम पर धान बिक जाता है। फायदा सीधा मिलरों तक और नुकसान किसान व सरकारी खजाने को
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किसानों के हक पर डाका

इस फर्जी खरीद से असली किसानों को उनकी फसल का दाम नहीं मिल पा रहा है, जबकि कागजों में खरीद पूरी दिखाकर लाखों-करोड़ों का खेल खेला जा रहा है। सरकारी धन की खुली लूट और व्यवस्था की साख दोनों दांव पर हैं

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