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खेत में काम कर रहे किसान को खा गया बाघ, क्षत-विक्षत मिला शव

खेत में काम कर रहे किसान को खा गया बाघ, क्षत-विक्षत मिला शव

घटना से दहशत, पुलिस ने पोस्टमार्टम को भेजा शव

पीलीभीत।धान कटाई के बाद खेत में गेहूं की बुवाई की तैयारी में जुटे किसान पर बाघ ने हमला कर मौत के घाट उतार दिया। मंगलवार शाम तक घर न लौटने पर परिवार और ग्रामीणों ने उनकी खोजबीन शुरू की, लेकिन कोई पता नहीं चला। बुधवार सुबह किसान का अधखाया शव जंगल के किनारे मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। शव क्षत-विक्षत हालत में मिला — शरीर पर गहरे नाखूनों और दांतों के निशान साफ दिखे। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम को भेजा है। घटना से ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखे जा रही है।

पीलीभीत टाइगर रिजर्व की खुली सीमा से लगातार मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही है। जंगल किनारे खेत होने पर ग्रामीण वन्यजीवों का निवाला बन रहे हैं। भय से अधिकांश लोग खेतों की रखवाली नहीं कर पाते हैं। इससे उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है। पूरनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव टांडा छत्रपति निवासी छोटेलाल 40 वर्ष पुत्र का बराही रेंज की पताबोझी वन चौकी के पास खेत है। धान कटाई के बाद मंगलवार को वह गेहूं की बुवाई की तैयारी के लिए खेत का परेबा करने के लिए नाला ठीक कर रहे थे। तभी झाड़ियां में बैठे बाघ ने उन पर हमला कर दिया। शाम तक ग्रामीण के घर वापस न लौटने पर परिवार के लोगों ने खेत पर देखा तो वह नहीं मिले। गांव सहित आसपास क्षेत्र में खोजबीन के दौरान भी उनका सुराग नहीं लग सका। मंगलवार सुबह बाघ के हमले की आशंका के चलते काफी ग्रामीण जंगल किनारे छोटे लाल की खोजबीन में जुट गए। तभी उनका अधखाया शव देखा गया। धड़ और पैर अलग मिलने से खलबली मच गई। घटना को लेकर काफी संख्या में ग्रामीण पहुंच गए। मौके पर वनकर्मी और पुलिस ने भी पहुंचकर पड़ताल की। घटना को लेकर ग्रामीणों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। गांव के लोगों ने बताया काफी दिनों से खेतों में बाघ की चहलकदमी देखी जा रही है। इसके बावजूद वनकर्मियों ने निगरानी बढ़ाने की जरूरत नहीं समझी।

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ग्रामीण का अधखाया शव जंगल में लगभग 300 मीटर अंदर मिला है। मौके पर किसी भी वन्यजीव के पग मार्ग नहीं मिले हैं। शव पोस्टमार्टम को गया है। मामले की गहनता से जांच की जा रही है।

मनीष कुमार 

प्रभागीय वनाधिकारी पीटीआर

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खाना देने गई बेटी लौटी वापस

 

छोटेलाल ने खेत की बुवाई के लिए बीज और खाद की व्यवस्था कर ली थी। सुबह से ही वह खेत में काम करने पहुंच गए। दोपहर बाद तक घर नहीं पहुंचे तो उनकी बेटी पुष्पा खेत पर खाना देने पहुंची। काफी देर तक आवाज देने के बावजूद पिता नहीं मिले। पड़ोस में रखवाली कर रहे किसानों से पूछने पर भी उनके बारे में कुछ नहीं पता चला। इस पर बेटी खाना लेकर वापस लौट आई।

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वन चौकी पर ताला डालकर भागा स्टाफ

 

बाघ के हमले के बाद पताबोझी वन चौकी पर तैनात कर्मचारी चौकी में ताला डालकर फरार हो गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि हमला वनकर्मियों की मौजूदगी में हुआ। खेत पर जब छोटेलाल बाघ का शिकार बना, ग्रामीणों की आवाजें चौकी तक पहुंचीं, लेकिन डर के चलते स्टाफ वहां से भाग निकला। इस लापरवाही ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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मां के बाद पिता की मौत, अनाथ हुए बच्चे

 

छोटेलाल छह भाई-बहनों में पांचवें नंबर पर थे। सात वर्ष पूर्व उनकी पत्नी शारदा देवी की मौत हो चुकी है। अब दो मासूम बच्चे — 10 वर्षीय आकाश और 16 वर्षीय पुष्पा — पूरी तरह अनाथ हो गए हैं। पिता की मौत की खबर सुनते ही दोनों बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मुआवजा और बच्चों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी लेने की मांग की है।

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