जंगली हाथियों ने ग्रामीण को कुचलकर मार डाला, घर तोड़कर फसल रौंदी

जंगली हाथियों ने ग्रामीण को कुचलकर मार डाला, घर तोड़कर फसल रौंदी
पूरनपुर/पीलीभीत। कलीनगर तहसील क्षेत्र के शारदा पार इलाके में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। नेपाल सीमा से सटे इस क्षेत्र में आए दिन हाथियों के झुंड किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं, वहीं अब इंसानों की जान पर भी आफत बनते जा रहे हैं।जानकारी के अनुसार, कलीनगर तहसील क्षेत्र के ग्राम रमनगरा, नगरिया खुर्द कला, गोरख डिब्बी, थारू बस्ती और ढकिया महाराजपुर के लोग शारदा नदी पार छप्परपोश घर बनाकर खेती-बाड़ी करते हैं। इस क्षेत्र में नेपाली हाथियों और अन्य वन्यजीवों का खतरा हमेशा बना रहता है। लगातार ये वन्यजीव धान की फसल में घुसकर भारी नुकसान कर रहे हैं।इसी क्रम में 1 और 2 नवंबर की दरमियानी रात जंगली हाथियों के झुंड ने नगरिया खुर्द कला के निकट ग्राम ढकिया महाराजपुर में जमकर उत्पात मचाया। हमले में गांव निवासी पुन्नों (58 वर्ष) पुत्र तेज्यों की दर्दनाक मौत हो गई। बताया जा रहा है कि घटना के समय पुन्नों अपने घर में सो रहे थे। रात करीब 2 बजे हाथियों का झुंड गांव में घुस आया और घरों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। जब पुन्नों ने भागने का प्रयास किया, तो हाथियों ने उन पर हमला कर दिया। हाथियों ने उन्हें पैरों तले कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
सूचना मिलते ही शारदा पुलिस, वन विभाग की टीम और स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद से पूरे इलाके में दहशत का माहौल व्याप्त है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि वर्षों से हाथियों के आतंक से लोग परेशान हैं, लेकिन वन विभाग सिर्फ औपचारिकता निभाता है।ग्रामीणों ने कहा कि पीलीभीत टाइगर रिजर्व बनने के बाद से इस पार के गांवों में वन्यजीवों की आवाजाही और बढ़ गई है। लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम नहीं किए गए। न तो कोई चेतावनी तंत्र है, न ही सुरक्षा बाड़। नतीजतन हर साल कई लोग बाघ, तेंदुए और हाथियों के हमलों में अपनी जान गंवा रहे हैं।गांव वालों ने मांग की है कि सरकार और वन विभाग तत्काल प्रभाव से प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा दीवार, अलार्म सिस्टम और गश्त की व्यवस्था सुनिश्चित करें, साथ ही मृतक परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। तहसील से कोई जिम्मेदार अफसर के न पहुंचने से भी ग्रामीणों में रोष देखा जा रहा है।
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ग्रामीण बोले — आश्वासन देकर समस्याओं को भूल जाते हैं अफसर
ग्रामीणों ने कहा — “वन विभाग और प्रशासन हर घटना के बाद आश्वासन देता है, लेकिन न कोई चेतावनी तंत्र है, न सुरक्षा बाड़। हर साल जानवर किसी की फसल रौंदते हैं, किसी की जान ले लेते हैं।” घटनाओं के बाद सांत्वना देने पहुंचते हैं, फिर समस्याओं को भूल जाते हैं। वन विभाग और प्रशासन के लिए यह घटना एक और चेतावनी है कि शारदा पार क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ठोस कदम न उठाए गए, तो स्थिति और भयावह हो सकती है। पहले जहां कभी-कभार जानवर दिखते थे, वहीं अब हर कुछ दिनों में किसी न किसी गांव से हमले की खबर आती है।
“जंगल तो सुरक्षित हो गया, पर इंसान असुरक्षित हो गया,” ग्रामीणों ने तंज कसा।
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ग्रामीणों में दहशत और गुस्सा
गांव के लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले महीनों में भी हाथियों ने कई बार खेतों और घरों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन वन विभाग ने सिर्फ खानापूरी की।
“हर बार अधिकारी आते हैं, फोटो खींचते हैं, रिपोर्ट बनाते हैं और चले जाते हैं। कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
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फसलों को रौंदकर तोड़े घर
कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव रमनगरा, नगरिया खुर्द कला, थारू बस्ती और गोरख डिब्बी के लोग अपनी फसल की रखवाली के लिए जान तक गांव पर लगा देते हैं। ग्रामीण को कुचलकर मारने से पहले और बाद में हाथियों ने कई किसानों की फसले रौंदकर छप्पर पोश घर भी तोड़े हैं। ग्रामीण रोजाना इसी खतरे के साये में जी रहे हैं। शारदा पार इलाके में बसे सैकड़ों परिवार छप्परपोश घर बनाकर खेती करते हैं। नेपाली जंगल से आने वाले हाथी, बाघ और तेंदुए अक्सर इन गांवों तक पहुंच जाते हैं।




