पराली न जलाने के लिए जिलाधिकारी ने दिखाई हरी झंडी, किसानों से की अपील
पराली को जलाएं नहीं, जैविक खाद व पशु चारे के रूप में करें उपयोग:जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह

पराली न जलाने के लिए जिलाधिकारी ने दिखाई हरी झंडी, किसानों से की अपील
पराली को जलाएं नहीं, जैविक खाद व पशु चारे के रूप में करें उपयोग:जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह
पीलीभीत।जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने मंगलवार को गांधी सभागार से पराली न जलाने के संदेश के साथ प्रचार वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने किसानों से अपील की कि पराली को जलाने के बजाय खेतों में गलाकर जैविक खाद के रूप में उपयोग करें। उन्होंने कहा कि इससे मिट्टी की उर्वरकता शक्ति बनी रहती है और खेत की गुणवत्ता में सुधार होता है। साथ ही पराली को पशु चारे के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।जिलाधिकारी ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार किसानों को पराली जलाने से रोकने एवं फसल अवशेष प्रबंधन के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि कम्बाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर एस.एम.एस. अथवा अन्य फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों — जैसे स्ट्रारीपर, बेलर, मल्चर, पैडी स्ट्राचॉपर, श्रबमास्टर, रोटरी स्लेशर, रिवर्सिबल एम.बी. प्लॉ आदि का उपयोग किया जाए।
यदि कोई कम्बाइन स्वामी इन यंत्रों का प्रयोग किए बिना फसल कटाई करता है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।ऐसे किसान जो जीरो टिल सीड कम फर्टी ड्रिल, हैपी सीडर, सुपर सीडर या डिकम्पोजर से रबी की बुवाई करना चाहते हैं, उन्हें यह घोषणा देनी होगी कि वे पराली नहीं जलाएंगे।उप कृषि निदेशक कार्यालय में इस संबंध में नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है, जहां किसान या नागरिक पराली जलाने की सूचना दे सकते हैं।सदर एवं अमरिया तहसील: 7906027761 (श्री तेजपाल)पूरनपुर एवं कलीनगर तहसील: 8601017510 (श्री नूतन कुमार)बीसलपुर तहसील: 9721667979 (श्री नंद किशोर)अतिरिक्त संपर्क: 9568804170 (श्री कुलवंत सिंह) जुर्माना,2 एकड़ से कम ₹5,0002 से 5 एकड़ ₹10,000,5 एकड़ से अधिक ₹30,000,पिछले वर्ष 75 किसानों से ₹2,10,000, जबकि वर्ष 2024 में 18 किसानों से ₹72,500 अर्थदंड वसूला गया था।इस अवसर पर उप कृषि निदेशक इंजीनियर कौशल किशोर, उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी सदर, अवर अभियंता अनिल कुमार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।जिलाधिकारी ने कहा कि किसान भाई पराली को जलाने की बजाय खेतों में गलाकर जैविक खाद बनाएं, जिससे पर्यावरण और भूमि दोनों की रक्षा होगी।”




