मिशन शक्ति 5.0” के तहत बालिकाओं को दिया गया आत्मरक्षा का प्रशिक्षण
प्रिंस ताइक्वांडो अकादमी में 196 छात्राओं ने सीखे आत्मरक्षा के गुर बालिकाओं को किया गया सशक्त और जागरूक

“मिशन शक्ति 5.0” के तहत बालिकाओं को दिया गया आत्मरक्षा का प्रशिक्षण
प्रिंस ताइक्वांडो अकादमी में 196 छात्राओं ने सीखे आत्मरक्षा के गुर बालिकाओं को किया गया सशक्त और जागरूक
पीलीभीत।महिला कल्याण विभाग, जनपद पीलीभीत द्वारा “मिशन शक्ति फेज 5.0” के विशेष 90 दिवसीय अभियान के अंतर्गत सोमवार को बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के उद्देश्य से एक सेल्फ डिफेंस कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रिंस ताइक्वांडो अकादमी में संपन्न हुआ, जिसमें विद्यालय की 196 छात्राओं ने आत्मरक्षा के मूलभूत गुर सीखे।कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने छात्राओं को विभिन्न परिस्थितियों में स्वयं की सुरक्षा के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी। प्रशिक्षण में यह सिखाया गया कि किसी भी विपरीत परिस्थिति या हमले की स्थिति में शांत रहकर किस प्रकार अपनी सुरक्षा की जा सकती है।सेंटर मैनेजर तृप्ति मिश्रा ने बालिकाओं को संबोधित करते हुए कहा,हर बालिका को स्वयं में शक्ति का एहसास होना चाहिए। जागरूक और आत्मनिर्भर बनकर ही हम समाज में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती हैं। आत्मरक्षा केवल शारीरिक शक्ति नहीं, बल्कि मानसिक दृढ़ता का प्रतीक भी है।”उन्होंने आत्मरक्षा उपकरणोंकी जानकारी देते हुए कहा कि आत्मरक्षा हथियार ऐसे उपकरण या तकनीकें हैं जो किसी हमले या टकराव के समय व्यक्ति को शारीरिक नुकसान से बचाने में सहायक होती हैं।जिला मिशन कोऑर्डिनेटर सुवर्णा पांडेय ने बालिकाओं को आत्मरक्षा से जुड़े व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि सुरक्षा केवल बाहरी उपायों से नहीं, बल्कि सजगता से भी संभव है।उन्होंने बताया कि आत्मरक्षा के लिए गैर-घातक उपकरणों — जैसे काली मिर्च स्प्रे, पर्सनल अलार्म आदि का उपयोग महिलाएं आसानी से कर सकती हैं। वहीं, कुछ घातक विकल्प जैसे लाइसेंसी हथियार (अग्न्यास्त्र) भी कानून के दायरे में रखकर सुरक्षा हेतु प्रयोग किए जा सकते हैं।कार्यक्रम में जेंडर स्पेशलिस्ट जयश्री सिंह और अजीत सिंह सहित बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। प्रशिक्षकों ने बताया कि आत्मरक्षा का प्रशिक्षण केवल शारीरिक बचाव नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक मजबूत कदम है।प्रशिक्षण सत्र के अंत में छात्राओं ने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से उनमें आत्मविश्वास और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ी है।




