कौड़ियों के भाव बिक रहा है ट्रांस शारदा क्षेत्र में केला
उचित मूल्य न मिलने पर किसानों ने जोती केले की फसल

कौड़ियों के भाव बिक रहा है ट्रांस शारदा क्षेत्र में केला
उचित मूल्य न मिलने पर किसानों ने जोती केले की फसल
पीलीभीत जनपद की पूरनपुर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत ट्रांस शारदा क्षेत्र में कुछ वर्षों पहले गन्ने के भुगतान में हो रही देरी के कारण परेशान किसानों का गन्ने की खेती से मोह भंग हो गया था। जिससे किसानों ने अन्य फसलों की ओर अपना रुख कर लिया था। जिसमें सबसे ज्यादा केले की खेती ने किसानों को अपनी ओर आकर्षित किया था। वहीं शुरुआती दौर में केले ने किसानों को बेहतर मुनाफा दिया था। लेकिन चंद वर्षों बाद यही केले की फसल अब किसानों के लिए चिंता का सबब बन गई है। क्योंकि अब किसानों को उनकी केले की फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है जिससे वह अपनी फसल को कौड़ियों के भाव में बेच रहे हैं । इसलिए किसान मजबूरीवश अपने ही हाथों से खून पसीने से तैयार की गई केले की फसल को दिल पर पत्थर रखकर और आंखों में बेबसी व लाचारी के आंसू लिए उस फसल को जोतने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।इसी क्रम में ट्रांस शारदा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम मौरेनियां गांधी नगर निवासी किसान विपिन मिश्रा ने केले की फसल का उचित दाम नहीं मिलने पर शनिवार को अपनी लगभग डेढ़ एकड़ केले की फसल को जोत दिया है। वहीं इस दौरान दर्जनों केला किसानों ने विपिन मिश्रा के खेत में एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन कर शासन प्रशासन से केले की फसल का उचित मूल्य दिलाये जाने तथा किसानों को बर्बाद होने से बचाने की गुहार लगाई है। यहां आपको बता दें कि ट्रांस शारदा क्षेत्र में किसान हर दिन मजबूर होकर मेहनत व लागत लगाकर तैयार की गई केले की फसल को जोत रहे हैं। वहीं दूसरी ओर सरकारें किसानों की आय को दोगुनी करने की बात करती है। लेकिन यहां किसानों की आय दोगुनी होने की तो बात छोड़िए यहां उल्टा हो रहा है। क्योंकि यहां किसानों ने बैंक आदि से कर्ज लेकर वह पैसा केले की खेती में लगा दिया था। जिससे उचित रेट नहीं मिलने से किसान कर्ज के बोझ तले दबने के लिए अग्रसर हो रहे हैं । वहीं गांधीनगर के निवासी विपिन मिश्रा ने कहा कि ट्रांस शारदा क्षेत्र में किसान केले की खेती करके अपनी आय को बढ़ाना चाहते हैं। लेकिन यहां पर केला व्यापारी, बिचौलिये व पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, उत्तराखंड, राजस्थान आदि प्रदेशों के मेन चैंबर मालिक व दलाल केला किसानों का जमकर उत्पीड़न व शोषण कर रहे हैं। क्योंकि वर्तमान में यह व्यापारी चार रुपए से लेकर आठ रुपए के रेट में केले की खरीदारी कर रहे हैं। वहीं एक एकड़ में केले की फसल तैयार करने के लिए लगभग डेढ़ लाख रुपए खर्च होते हैं। और उपरोक्त रेट के अनुसार प्रति एकड़ में लगभग अस्सी हजार रुपये ही मिल पा रहे हैं।यहां आपको बता दें कि हमारा देश कृषि प्रधान देश होने के बावजूद भी किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है। इससे बड़ी विडंबना व त्रासदी और क्या हो सकती है।




