धान क्रय केंद्रों की कमी व धान किसानों की समस्याओं पर भाकियू ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन

धान क्रय केंद्रों की कमी व धान किसानों की समस्याओं पर भाकियू ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन
पीलीभीत।भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) ने जनपद पीलीभीत के किसानों की प्रमुख समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में किसान नेता बिक्रमजीत सिंह खैरा, तहसील अध्यक्ष कलीनगर ने कृषि से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं को उजागर करते हुए उनके शीघ्र समाधान की मांग की है।भाकियू ने बताया कि जनपद में धान की आवक के मुकाबले सरकारी धान क्रय केंद्रों की संख्या बहुत कम है, जिससे किसानों को अपनी उपज बेचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। संगठन ने धान क्रय केंद्रों की संख्या बढ़ाने, सभी केंद्रों पर पर्याप्त बारदान की उपलब्धता सुनिश्चित करने और केन्द्रों को चिन्हित स्थानों पर ही स्थापित किए जाने की मांग की है।
भाकियू के ज्ञापन में कहा गया है कि प्रत्येक धान क्रय केंद्र पर प्रति दिन कम से कम 600 क्विंटल धान की तौल की सीमा तय की जाए ताकि सभी किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ मिल सके। इसके साथ ही, जिले के तराई क्षेत्र की उर्वरता को देखते हुए प्रति एकड़ 28-30 क्विंटल धान का पंजीकरण कराया जाए।ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि पूरनपुर और कलीनगर तहसील क्षेत्रों में व्यापारी और चावल मिल मालिक धान की सीधी खरीद कर रहे हैं, जिससे किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। चावल मिलों पर धर्मकांटों के माध्यम से घटतौली की संभावना भी जताई गई है। संगठन ने पूरनपुर मंडी समिति में नीलामी प्रक्रिया को नियमों के अनुसार संचालित करने तथा व्यापारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।भाकियू ने अपने ज्ञापन में तहसील कलीनगर के ग्राम सिमरा (ता० महाराजपुर) की सरकारी सीलिंग भूमि (181 एकड़) पर स्थानीय भू-माफियाओं द्वारा अवैध कृषि कार्य किए जाने की शिकायत भी दर्ज कराई है। संगठन ने प्रशासन से तत्काल संज्ञान लेकर भू-माफियाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।साथ ही, भाकियू ने किसान सहकारी चीनी मिल, पूरनपुर का गन्ना पेराई सत्र 10 नवम्बर से प्रारंभ करने की मांग की है, ताकि किसान पेड़ी गन्ना समय पर मिल को आपूर्ति कर सकें और उसके बाद अपने खेतों में गेहूँ की समय से बुवाई कर सकें।ज्ञापन के अंत में तहसील अध्यक्ष बिक्रमजीत सिंह खैरा ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया कि उपरोक्त सभी समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर किसानों के हित में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।




