विश्व गेंडा दिवस पर विशेष: पीलीभीत टाइगर रिजर्व और गेंडे का अनोखा रिश्ता
नेपाल के शुक्लाफांटा से पीलीभीत तक का प्रवास बना जैव विविधता संरक्षण का प्रतीक

विश्व गेंडा दिवस पर विशेष: पीलीभीत टाइगर रिजर्व और गेंडे का अनोखा रिश्ता
नेपाल के शुक्लाफांटा से पीलीभीत तक का प्रवास बना जैव विविधता संरक्षण का प्रतीक
पीलीभीत।धरती के सबसे प्राचीन जीवों में गिने जाने वाला भारतीय एक सींग वाला गेंडा न केवल अपनी विशाल काया के कारण आकर्षक है, बल्कि यह हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का अभिन्न हिस्सा भी है। हर वर्ष 22 सितंबर को विश्व गेंडा दिवस मनाया जाता है, ताकि इस दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजाति के संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाई जा सके।इस अवसर पर पीलीभीत टाइगर रिजर्व और नेपाल के शुक्लाफांटा वाइल्डलाइफ़ रिजर्व के बीच गेंडे के प्रवास की कहानी विशेष महत्व रखती है।नेपाल का शुक्लाफांटा वाइल्डलाइफ़ रिजर्व गेंडों का सुरक्षित आश्रय स्थल है। यहां गेंडों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है और समय-समय पर ये गेंडे भारत की सीमा पार करके पीलीभीत टाइगर रिजर्व में प्रवेश कर जाते हैं।पीलीभीत का तराई घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र गेंडों के लिए उपयुक्त माना जाता है। यहां घनी घास, जलाशय और दलदली भूमि गेंडों के भोजन और आश्रय की जरूरतों को पूरा करते हैं। यही कारण है कि शुक्लाफांटा से भटककर आने वाले गेंडे यहां सहजता से बस जाते हैं और कुछ समय बिताते हैं।गेंडे केवल वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक संतुलन के प्रहरी भी हैं।गेंडे घास खाते हैं और इस तरह घासभूमि का संतुलन बनाए रखते हैं।इनके विचरण से दलदली क्षेत्रों में नमी और बीज प्रसार को बढ़ावा मिलता है।गेंडे की उपस्थिति किसी भी संरक्षित क्षेत्र में स्वस्थ जैव विविधता का संकेत है।हालांकि पीलीभीत क्षेत्र में गेंडे स्थायी रूप से नहीं बसे हैं, लेकिन उनका यहां आना इस बात का प्रमाण है कि दोनों देशों का पारिस्थितिक तंत्र गहराई से जुड़ा हुआ है।
शिकार और अवैध व्यापार: गेंडे का सींग काले बाजार में ऊंचे दामों पर बिकता है।मानव- वन्यजीव संघर्ष: गांवों व खेतों में पहुंच जाने पर लोग इनके प्रति आक्रामक हो जाते हैं।आवास ह्रास: घटते घास के मैदान और दलदली क्षेत्र इनके अस्तित्व के लिए खतरा हैं।गेंडे के संरक्षण के लिए भारत और नेपाल के बीच सीमा-पार सहयोग बेहद प्रभावी साबित हो रहा है।दोनों देशों के वन विभाग लगातार गेंडों की गतिविधियों की जानकारी साझा करते हैं।स्थानीय समुदायों को संरक्षण कार्यों से जोड़ने की कोशिश हो रही है।टरक्वाइज वाइल्डलाइफ़ कन्जर्वेशन सोसायटी के अध्यक्ष अख़्तर मियां खान कहते हैं:“विश्व गेंडा दिवस हमें यह याद दिलाता है कि गेंडे जैसे प्राचीन जीव केवल वन्य जीवन की धरोहर नहीं, बल्कि हमारे प्राकृतिक संतुलन के प्रहरी भी हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नेपाल से आने वाले गेंडे इस बात के गवाह हैं कि प्रकृति की सीमाएं नक्शे से नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी से तय होती हैं। सामूहिक प्रयास से हम गेंडों की उपस्थिति को हमेशा बनाए रख सकते हैं।




