यूपी
समर्थ उत्तर प्रदेश अभियान: छात्रों से संवाद, विकास के लिए दिए सुझाव
डीएम बोले—कौशल और इच्छाशक्ति से बनेगा सशक्त राष्ट्र

समर्थ उत्तर प्रदेश अभियान: छात्रों से संवाद, विकास के लिए दिए सुझाव
डीएम बोले—कौशल और इच्छाशक्ति से बनेगा सशक्त राष्ट्र
पीलीभीत।शताब्दी संकल्प 2047 के तहत चल रहे “समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश/2047 अभियान के दूसरे दिन शुक्रवार को रामलुभाई साहनी राजकीय महिला महाविद्यालय और राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के सभागारों में छात्र-छात्राओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें छात्र-छात्राओं ने अपने विचार रखे और प्रदेश को विकसित बनाने हेतु कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।महिला महाविद्यालय की छात्राओं ने अपने स्वास्थ्य व सुरक्षा संबंधी सुझाव दिए।प्राचार्य महिला महाविद्यालय ने कहा कि पारंपरिक कोर्स के साथ प्रोफेशनल कोर्स भी शुरू होने चाहिए ताकि छात्र आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन सकें।उपाधि महाविद्यालय के प्राचार्य ने शिक्षा का स्तर ऊँचा उठाने, लघु उद्योग व औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने कहा कि पीलीभीत कृषि प्रधान जिला है, यहाँ कृषि विश्वविद्यालय और कृषि आधारित उद्योग स्थापित होने चाहिए।आयुर्वेदिक कॉलेज के छात्रों ने विलुप्त हो रही जड़ी-बूटियों के संरक्षण, बीज बैंक की स्थापना, औषधियों की गुणवत्ता जांच हेतु प्रत्येक मंडल में लैब बनाने और अनुसंधान संसाधन उपलब्ध कराने जैसे ठोस सुझाव दिए।मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने कहा कि “मुख्यमंत्री ने ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए विकास की गति और तेज करनी होगी। विजन डॉक्यूमेंट बनाने में जन सहभागिता अनिवार्य है।जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत कभी “सोने की चिड़िया कहलाता था।हमें अपनी इच्छाशक्ति को मजबूत कर कौशल सीखना होगा और राष्ट्र निर्माण में योगदान देना होगा। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना जैसी योजनाएं युवाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बना रही हैं।प्रो. एम.के. सिंह (एमजेपी रोहेलखण्ड विश्वविद्यालय) ने कहा कि विकास सतत प्रक्रिया है। “पिछले आठ वर्षों की प्रगति को देखते हुए 2047 तक उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था 6 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।”एस.एस. ढाका, सहायक निदेशक ने छात्रों से अपील की कि वे क्यूआर कोड स्कैन कर अपने सुझाव साझा करें।इस संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों, विशेषकर युवाओं से सुझाव लेकर उन्हें विजन डॉक्यूमेंट में शामिल करना है, ताकि उत्तर प्रदेश को 2047 तक विकसित राज्यों की श्रेणी में लाया जा सके।




