शेरपुर कला से कारी अरशद, हाजी रहीस खां व डॉ. रफी अहमद बगदाद शरीफ के लिए रवाना

शेरपुर कला से कारी अरशद, हाजी रहीस खां व डॉ. रफी अहमद बगदाद शरीफ के लिए रवाना
पूरनपुर,पीलीभीत।धार्मिक आस्था और जियारत की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए शेरपुर कला गांव से रविवार को कारी अरशद और हाजी रहीस खां व डा़०रफी अहमद बगदाद शरीफ के लिए रवाना हुए।यह तीनो श्रद्धालु गौसे आज़म हज़रत अब्दुल क़ादिर जिलानी रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह कर्बला शरीफ की जियारत करने जा रहे हैं।गांव में उनके प्रस्थान से पहले विशेष विदाई समारोह का आयोजन किया गया। गांववासियों, रिश्तेदारों और स्थानीय गणमान्य लोगों ने तीनो को फूल मालाओं से स्वागत करते हुए विदाई दी। धार्मिक नारों के बीच पूरे गांव का माहौल आध्यात्मिक और भावनात्मक हो उठा।कारी अरशद ने रवाना होने से पूर्व कहा कि यह उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है कि उन्हें दरगाह-ए-गौसे आज़म की जियारत का अवसर मिल रहा है। वहीं हाजी रहीस खां ने बताया कि वह पूरे समाज और मुल्क की खुशहाली, अमन और तरक्की के लिए दुआएं करेंगे।स्थानीय लोगों ने बताया कि जब भी कोई श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा पर जाता है, तो गांव में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है। यह सिर्फ एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था और भाईचारे का प्रतीक है। विदाई के समय उपस्थित लोगों की आंखें भी नम हो गईं और सभी ने हाथ उठाकर उनकी सलामती और कुबूलियत की दुआ की।इस मौके पर कई सामाजिक और धार्मिक हस्तियां मौजूद रहीं। गांव के बुजुर्गों ने भी कारी अरशद और हाजी रहीस खां व डा० रफी अहमद को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वह वहां से लौटकर अपने अनुभव साझा करेंगे और पूरी बस्ती को भी इस आध्यात्मिक यात्रा का लाभ मिलेगा।तीनो श्रद्धालु दिल्ली से हवाई यात्रा कर बगदाद के लिए रवाना होंगे। अनुमान है कि लगभग दो सप्ताह तक वे इराक की पवित्र स्थली में रुककर इबादत करेंगे और जियारत पूरी करने के बाद वतन लौटेंगे। यह यात्रा न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है बल्कि शेरपुर कला गांव के लिए गर्व की बात है, क्योंकि हर बार जब कोई श्रद्धालु बगदाद शरीफ की जियारत करता है, तो वह गांव की पहचान को भी एक नई ऊंचाई देता है।




