शारदा नदी का कहर: सैकड़ों एकड़ भूमि समाई, किसान बेबस, प्रशासन खामोश
भू कटान से हजारा व शास्त्रीनगर गांव पर मंडराया खतरा

शारदा नदी का कहर: सैकड़ों एकड़ भूमि समाई, किसान बेबस, प्रशासन खामोश
भू कटान से हजारा व शास्त्रीनगर गांव पर मंडराया खतरा
एक माह से मिन्नतें कर रहे किसान,प्रशासन मौन,गुरुद्वारा साहिब से मांगी राहत
पूरनपुर,पीलीभीत।जनपद पीलीभीत की पूरनपुर तहसील अंतर्गत ट्रांस शारदा क्षेत्र के शास्त्रीनगर और हजारा ग्राम इन दिनों शारदा नदी के भीषण कहर से जूझ रहे हैं।करीब एक माह से लगातार भू कटान ने किसानों की सैकड़ों एकड़ उपजाऊ भूमि को निगल लिया है। हरे-भरे खेत, पकी हुई फसलें और किसानों की मेहनत सब नदी की लहरों में समा रही हैं। किसान असहाय होकर अपनी तबाही को अपनी आँखों के सामने देख रहे हैं।ग्रामीणों के अनुसार, हर दिन नदी की धारा जमीन काटते हुए आगे बढ़ रही है। दर्जनों किसान अपनी पुश्तैनी जमीन गंवा चुके हैं और कई और परिवारों पर खतरा मंडरा रहा है।गांव के बुजुर्ग किसान का कहना है हमने अपनी पूरी जिंदगी मेहनत करके जमीन बनाई, लेकिन शारदा नदी ने सब छीन लिया। अब न खेत बचे, न सहारा। यह दर्द केवल हम जानते हैं।कटान पीड़ित ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार एक महीने से वे प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई राहत कार्य शुरू नहीं हुआ।
ग्रामीणों ने कहा हमने कई बार अधिकारियों से मुलाकात की, लेकिन सिर्फ आश्वासन मिला। न तो बंधा बना, न ही कोई रोकथाम कार्य हुआ। अब गांव का अस्तित्व ही खतरे में है।प्रशासनिक मदद न मिलने से निराश ग्रामीण लखीमपुर खीरी जनपद के नानक प्याउ महंगापुर गुरुद्वारा साहिब की शरण में पहुँचे। बुधवार को गुरुद्वारा साहिब से आए ग्रंथी साहिबान और सेवादारों ने कटान पीड़ितों के साथ शारदा नदी किनारे पहुंचकर अरदास की। उन्होंने गुरु का प्रसाद और भोग लगाकर नदी से शरबत के भले की कामना की।ग्रामीणों ने बताया कि इस धार्मिक संबल ने उन्हें टूटे हुए मनोबल को सँभालने की ताक़त दी।कटान पीड़ित ग्रामीणों की चिंता वाजिब है। लगभग 25 साल पहले भी यही गांव बाढ़ और भू कटान की त्रासदी झेल चुका है। उस समय हजारों लोग बेघर हुए थे। अब जब किसानों ने वर्षों की मेहनत से फिर से अपनी गृहस्थी बसाई थी, तो एक बार फिर शारदा नदी ने उनके भविष्य को खतरे में डाल दिया है।ग्राम प्रधान वासुदेव कुंडू ने कहा अगर तुरंत ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हजारा और शास्त्रीनगर गांव का नामोनिशान तक मिट सकता है। प्रशासन को तुरंत कटान रोकने के लिए पुख्ता इंतज़ाम करने चाहिए।अगर सरकार और प्रशासन अब भी नहीं जागे तो हमें अपने घरों और जमीनों से हाथ धोना पड़ेगा। हमारी मांग है कि कटान रोकने को लेकर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए।शारदा नदी किनारे तुरंत बंधा निर्माण किया जाए।भू कटान रोकने के लिए बड़े स्तर पर बचाव कार्य शुरू हो।प्रभावित परिवारों को मुआवज़ा और पुनर्वास पैकेज दिया जाए।स्थायी समाधान हेतु सरकारी योजना और विशेषज्ञ टीम तैनात की जाए।




