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साढ़े चार सालों से ग्राम पंचायतों में ग्राम प्रधान लें रहे मानदेय, पंचायत सदस्यों की मेहनत पर सवाल
अधिकांश ग्राम पंचायत सदस्यों को नहीं मिला मानदेय, पंचायतों का कार्यकाल समापन के करीब

बैठकों में भाग लेने वाले सदस्यों के लिए मानदेय का प्रावधान, लेकिन स्थानीय स्तर पर नहीं हो रही क्रियान्वयन
पूरनपुर, पीलीभीत।
ग्राम पंचायत की खुली बैठक कर विकास की रूपरेखा तय करने का शासन का फरमान है। इन बैठकों में प्रतिभाग करने वाले पंचायत सदस्यों को बकायदे मानदेय देने का शासनादेश है। ग्राम पंचायत सदस्यों के मानदेय की भी बड़े पैमाने पर चोरी होती है। सच्चाई यह भी है कि पंचायत सदस्यों को भी उनके अधिकार के बारे में मालूम नहीं है। इसी का परिणाम है कि पंचायतें प्रतिवर्ष हजारों रुपये की पंचायत सदस्यों के मानदेय का मद खाली हो जाता है।ग्राम प्रधान शासन के निर्धारित मानदेय ले रहे हैं लेकिन सदस्यों खाली हाथ हैं। उनके लिए सरकार से निर्धारित प्रति बैठक 100 रुपये मानदेय उन्हें नहीं दिया जा रहा। जिले की पंचायतों का कार्यकाल अब अपने समापन के करीब है, लेकिन ग्राम पंचायत सदस्यों को अभी तक मानदेय न मिलने से उनमें रोष व्याप्त है। शासन द्वारा स्पष्ट प्रावधान किया गया है कि ग्राम पंचायत की बैठकों में शामिल होने वाले सदस्यों को मानदेय दिया जाएगा। इसके बावजूद पूरनपुर क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में अब तक सदस्यों को यह सुविधा नहीं मिल पाई। हालांकि कुछ ग्राम पंचायत में ग्राम पंचायत सदस्यों को मानदेय भी दिया गया है। लेकिन अधिकांश ग्राम पंचायत में सदस्यों को अभी तक मानदेय नहीं मिला है। जिससे सदस्यों में नाराजगी देखी जा रही है। पूरनपुर विकासखंड की कुछ गिनी चुनी ग्राम पंचायतों में सदस्यों का भुगतान किया जा चुका है। लेकिन अधिकांश पंचायत में अभी तक सदस्यों का मानदेय नहीं दिया गया है। बता दें कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार करने के लिए बोर्ड की जो बैठकें आहूत किए जाने की व्यवस्था है। उसकी अधिकांश ग्राम पंचायतों में पिछले साढ़े चार वर्षों से जमकर धज्जियां उड़ाई गई, या यूं कहे कि उसमें भी बड़ा खेल किया गया है। ब्लॉक क्षेत्र व सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायतों में आज तक बोर्ड की बैठकें ही नहीं हुई, क्योंकि अगर बोर्ड की बैठकें विधिवत हुई होती, तो निश्चित रूप से बैठक में शामिल होने वाले सदस्यों को मानदेय दिया जाता, लेकिन ऐसा ग्राम पंचायतों में नहीं हुआ, आरोप है कि गत करीब साढ़े 4 वर्षों से ग्राम पंचायतों में बोर्ड की बैठकें सदस्यों के फर्जी हस्ताक्षर कर दर्शाई जा रहीं थीं। बताते हैं कि ग्राम पंचायतों में प्रति माह बोर्ड की बैठक किए जाने की व्यवस्था के बावजूद क्षेत्र की अधिकांश ग्राम पंचायतों में विधिवत आज तक एक भी बैठक नहीं हुई। ग्राम पंचायत सदस्यों का कहना है कि शासन स्तर से मानदेय की व्यवस्था होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाया है।अब सवाल यह उठता है क्या अन्य किसी ग्राम पंचायत के सदस्यों को मानदेय के रूप में मिलने वाली धनराशि का लाभ नहीं मिलेगा लेकिन कार्यकाल में अब सिर्फ कुछ महीने ही शेष बचे हैं ऐसे में सवाल यह उठता है, कि क्या अन्य किसी ग्राम पंचायत के सदस्य को मानदेय की धनराशि का लाभ मिल पाएगा या नहीं।ग्राम पंचायत सदस्यों ने शासन व प्रशासन से जल्द से जल्द मानदेय दिलाए जाने की मांग की है।




