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पीलीभीत में साइबर क्राइम थाना पुलिस को मिली बड़ी सफलता, साइबर ठगी करने वाले गैंग का खुलासा

डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी करने वाले पांच आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार

आरोपियों के पास से 09 मोबाइल, 3.50 लाख नगद, 10 फर्जी आधार कार्ड और 02 चैकबुक भी बरामद

ब्यूरो, पीलीभीत।

बढ़ते साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान में पीलीभीत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है।

जिले की साइबर क्राइम थाना पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से साइबर ठगी करने वाले गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने पांच अन्तर्राज्यीय साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से पुलिस ने नौ मोबाईल फोन, तीन लाख पचास हजार नगद 10 फर्जी आधार कार्ड आधार सहित दो चेक बुक को बरामद किया है। गिरफ्तार किए सभी आरोपियों को पुलिस ने जेल भेज दिया है। एसपी अभिषेक यादव ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साइबर ठगी करने वाले गैंग का खुलासा करने की जानकारी दीं है। जिले के साइबर क्राइम थाने में 21 दिसंबर 2024 को एक युवक जगमोहन सैनी ने डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से साइबर ठगों के खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उन्होंने ने बताया था कि कि कुछ अज्ञात व्यक्तियों ने खुद को सीबीआई, क्राइम ब्रांच व सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट में रखते हुए 09 से 22 अगस्त 2024 के बीच 57 लाख 89 हजार की ठगी की थी। मुकदमा दर्ज होने के बाद घटना के खुलासे के लिए पुलिस अधीक्षक द्वारा तीन टीमों का गठन किया गया। जिसके बाद 5 सितंबर 2025 को मुखबिर की सूचना पर पूरनपुर रोड स्थित पेट्रोल पंप के आगे से पांच संदिग्धों को घेराबंदी कर दबोचा लिया। जिसमें पुलिस ने आरोपी मनीष कुमार निवासी सूरजपुर ग्रेटर नोएडा जनपद गौतम बुद्धनगर, विकास वर्मा निवासी तिमारपुर नई दिल्ली,राजेन्द्र शर्मा उर्फ राजन निवासी नोएडा एक्सटेंशन, संजय बोबी देशवाल निवासी नोएडा, प्रशान्त चौहान निवासी फर्रुखाबाद, हाल पता निवासी द्वारिका दिल्ली को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी मनीष के पास से 49,000 नकद, 1 मोबाइल, 2 आधार कार्ड, आरोपी विकास वर्मा के पास से 59,000 नकद, 1 मोबाइल, 2 आधार कार्ड, व राजेंद्र शर्मा उर्फ़ राजन के पास से एक लाख 10 हजार नगद, पांच मोबाइल, 2 चैकबुक, 2 आधार कार्ड,संजय बोबी देशवाल के पास से 88,000 नकद, 1 मोबाइल, 2 आधार कार्ड,प्रशान्त चौहान के पास 44,000 नकद, 1 मोबाइल, 2 आधार कार्ड बरामद किए है। सभी आरोपियों के पास से कुल नौ मोबाईल, 10 फर्जी आधार कार्ड और दो चेक बुक सहित तीन लाख 50 हजार रूपये नकद बरामद किए है। पुलिस ने सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है। गिरोह में शामिल अन्य आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है।

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आरोपी अपने आपको सीबीआई, साइबर क्राइम का अधिकारी बताकर करतें थे ठगी

 

साइबर ठगों द्वारा विडियो काल पर अपने आपको सीबीआई, साइबर क्राइम का अधिकारी बताकर डिजिटल अरेस्ट कर साइबर ठगी जाती थी। पुलिस पूछताछ में अभियुक्तों ने स्वीकार किया कि वे संगठित गिरोह के रूप में काम करते हैं। ये गरीब व आर्थिक रूप से कमजोर लोगों से बैंक खाते, पासबुक और एटीएम अपने कब्जे में लेकर उन्हें मामूली कमीशन देते। फिर इन्हीं खातों का उपयोग डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन निवेश, फर्जी लोन ऐप और यूपीआई फ्रॉड जैसी ठगी से प्राप्त रकम को स्थानांतरित करने में करते। पैसा नकद निकासी कर कुछ हिस्सा अपने पास रखते और बाकी धनराशि कम्बोडिया व लाउस जैसे साउथ-ईस्ट एशियाई देशों में बैठे अपने सरगना को भेजते थे।

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डिजिटल अरेस्ट क्या है?

 

डिजिटल अरेस्ट कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं बल्कि साइबर ठगों की नई चाल है। इसमें वे खुद को पुलिस, सीबीआई या कोर्ट का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर व्यक्ति को डराते हैं कि उसके खिलाफ गंभीर आरोप हैं। फिर उसे घर में ही “डिजिटल कस्टडी” में रखने की बात कहकर बैंक खातों से रुपये ट्रांसफर करवा लेते हैं।

 

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डिजिटल अरेस्ट कैसे होता है ठगी का जाल

 

ठग वीडियो कॉल या फोन पर खुद को पुलिस, CBI या कोर्ट का अधिकारी बताकर डराते हैं। व फर्जी दस्तावेज़, लोगो और पहचान पत्र दिखाकर विश्वास दिलाते हैं। मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या फाइनेंशियल फ्रॉड का आरोप लगाकर पीड़ित को धमकाते हैं। घर में ही “डिजिटल कस्टडी” में रहने का दबाव बनाते हैं। बैंक खातों से पैसे ट्रांसफर करवाते हैं या लोन लेने को मजबूर करते हैं। फिशिंग वेबसाइट, ईमेल या SMS से OTP, पासवर्ड, UPI पिन जैसी जानकारी हासिल करते हैं। फर्जी QR कोड स्कैन करवाकर खाते से रकम निकाल लेते हैं।अवैध लोन ऐप इंस्टॉल करवा कर निजी डेटा (गैलरी, कॉन्टैक्ट्स) चुरा लेते हैं और ब्लैकमेल करते हैं।संदिग्ध लिंक/ऐप से मालवेयर डालकर बैंकिंग ऐप्स का डेटा चोरी कर लेते हैं। पुलिस या सरकारी अधिकारी कभी वीडियो कॉल पर “कस्टडी” नहीं लेते और न ही पैसे ट्रांसफर कराते हैं। व किसी भी अनजान QR कोड, लिंक या ऐप पर भरोसा न करें। OTP, पासवर्ड और UPI पिन किसी से साझा न करें। सिर्फ ऑफिशियल ऐप स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें।

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साइबर ठगी से बचाव के उपाय

बदलते डिजिटल युग में साइबर अपराधी नित नए तरीके अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। आए दिन ऑनलाइन ठगी की घटनाएं सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लोग सतर्क रहें तो इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।साइबर सेल के अनुसार अपराधी खुद को बैंक अधिकारी, पुलिस, कोर्ट या सरकारी संस्था का कर्मचारी बताकर कॉल करते हैं और लोगों से ओटीपी, एटीएम पिन या पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी हासिल कर खाते से रकम साफ कर देते हैं।अधिकारियों ने लोगों को सतर्क करते हुए कहा कि कोई भी बैंक या सरकारी एजेंसी फोन पर कभी ओटीपी या पासवर्ड नहीं मांगती। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें और अनजान ऐप्स डाउनलोड न करें। निवेश और इनाम के नाम पर आने वाले संदेश भी अक्सर ठगी का हिस्सा होते हैं। पुलिस ने अपील की है कि यदि किसी के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी होती है तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर सूचना दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

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