यूपी
पीलीभीत में खरीफ उत्पादकता गोष्ठी सम्पन्न, 750 किसानों ने लिया भाग
डीएम बोले—इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनाकर किसान बनें आत्मनिर्भर

पीलीभीत में खरीफ उत्पादकता गोष्ठी सम्पन्न, 750 किसानों ने लिया भाग
डीएम बोले—इंटीग्रेटेड फार्मिंग अपनाकर किसान बनें आत्मनिर्भर
पीलीभीत।जिला मुख्यालय स्थित गांधी स्टेडियम प्रेक्षागृह में शुक्रवार को एक दिवसीय जनपद स्तरीय खरीफ उत्पादकता गोष्ठी व मिलेट्स/तिलहन मेला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी ज्ञानेन्द्र सिंह ने की। इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी राजेन्द्र कुमार श्रीवास, उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी समेत गन्ना, पशुपालन, उद्यान, सिंचाई, मत्स्य व रेशम विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।मेले में कृषि विभाग सहित विभिन्न विभागों व निजी संस्थाओं ने स्टॉल लगाकर योजनाओं, तकनीकों और नई प्रजातियों का प्रदर्शन किया। इस दौरान लगभग 750 प्रगतिशील कृषकों ने भागीदारी की।जिलाधिकारी ने किसानों से समन्वित कृषि प्रणाली (इंटीग्रेटेड फार्मिंग) अपनाने का आह्वान किया और कहा कि “प्रधानमंत्री का लक्ष्य 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, जिसके लिए उत्तर प्रदेश का कृषि क्षेत्र मजबूत करना होगा।उन्होंने कृषकों से मुर्गी पालन को बढ़ावा देने की अपील की, ताकि अंडों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता लाई जा सके।मणि एग्रोहब प्रा. लि. लखनऊ के डॉ. अयूब ने किसानों को मोती की खेती के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि “पीलीभीत में 10 किसानों के यहां मोती की खेती के प्रोजेक्ट स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे दोगुना नहीं बल्कि चार गुना तक लाभ संभव है।उप कृषि निदेशक राममिलन सिंह परिहार ने किसानों को फार्मर रजिस्ट्री, डिजिटल क्रॉप सर्वे, प्रमाणित बीजों पर अनुदान और कृषि यंत्रीकरण योजना की जानकारी दी।कृषि विज्ञान केन्द्र टांडा विजैसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. ढाका ने कम लागत में अधिक उत्पादन पाने के लिए नई तकनीकें बताईं।जिला कृषि अधिकारी नरेंद्रपाल ने उर्वरक उपलब्धता, फसल बीमा, रबी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और पादप रोग प्रबंधन पर विस्तार से जानकारी दी।गोष्ठी के दौरान विभागीय स्टॉलों का जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी ने अवलोकन किया। किसान नई तकनीकों और योजनाओं को जानकर उत्साहित नजर आए।



