पंजाब बाढ़ पीड़ितों के लिए मुस्लिम समाज ने बढ़ाया मदद का हाथ
ईद मिलादुन्नबी पर दिखाई इंसानियत की मिसाल,गुरुद्वारा कमेटी को सौंपी आर्थिक सहायता

पंजाब बाढ़ पीड़ितों के लिए मुस्लिम समाज ने बढ़ाया मदद का हाथ
ईद मिलादुन्नबी पर दिखाई इंसानियत की मिसाल,गुरुद्वारा कमेटी को सौंपी आर्थिक सहायता
पूरनपुर,पीलीभीत।पंजाब में हाल ही में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। ऐसे कठिन समय में पूरनपुर के मुस्लिम समाज ने इंसानियत और भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए बाढ़ पीड़ितों के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया।ईद मिलादुन्नबी के मौके पर मुस्लिम समाज के लोगों ने निर्णय लिया कि त्योहार को आपसी सौहार्द और सेवा भाव के साथ मनाया जाएगा।इसी क्रम में समुदाय के युवाओं और बुज़ुर्गों ने मिलकर आर्थिक सहायता राशि एकत्र की।इस धनराशि को समाजवादी पार्टी के युवा नेता नोमान अली वारसी के नेतृत्व में गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा,ब्लॉक रोड, पूरनपुर को सौंपा गया।सहयोग राशि प्राप्त करते हुए गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ने कहा कि जब समाज की दीवारें धर्म और मज़हब से ऊपर उठकर इंसानियत को प्राथमिकता देती हैं, तभी असली भाईचारे का परिचय मिलता है।मुस्लिम समाज द्वारा दिया गया यह सहयोग न केवल आर्थिक मदद है, बल्कि मानवता की बड़ी मिसाल भी है।इस अवसर पर किसान नेता स्वराज सिंह, सभासद मो.मियाँ बरकाती, इमरान खाँ,आकिल खाँ,छब्बा, गुरुद्वारा सिंह सभा के बलजीत सिंह खैरा,रंजीत सिंह सहित अनेक लोग मौजूद रहे। सभी ने मुस्लिम समाज की इस पहल की सराहना की और कहा कि इस प्रकार की एकजुटता देश की असली पहचान है।मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सिर्फ मदद करना नहीं, बल्कि यह संदेश देना भी है कि सभी धर्म और समुदाय मिलकर किसी भी आपदा का सामना कर सकते हैं।
नोमान अली वारसी ने कहा –
ईद का असली मकसद खुशियां बांटना है। यदि हमारी छोटी-सी कोशिश से किसी परिवार का दुख कम होता है तो यही सबसे बड़ी इबादत है।समाज के लोगों ने भरोसा दिलाया कि आगे भी बाढ़ पीड़ितों और ज़रूरतमंदों की हरसंभव मदद की जाएगी। उन्होंने प्रशासन और अन्य संगठनों से भी अपील की कि अधिक से अधिक सहयोग देकर पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाई जाए।
इस घटना ने एक बार फिर साबित किया है कि भारत की असली ताकत उसकी गंगा- जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारा है।धर्म और मज़हब से ऊपर उठकर इंसानियत की सेवा ही सबसे बड़ी पूजा और सबसे बड़ी इबादत है।पूरनपुर से मिली यह पहल पूरे समाज के लिए प्रेरणा का संदेश देती है।




