
हकीकत की पड़ताल: जलभराव से बेहाल जनता, संवाद में छलका दर्द और गुस्सा
पीलीभीत। पिछले पांच दिन हुई बरसात से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। शहर से लेकर गांव तक पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। शारदा किनारे बसे गांवों में हालात बेहद खराब हैं और कई जगह बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो चुकी है। सड़कों पर जलभराव से यातायात प्रभावित है, वहीं सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों तक में पानी घुस गया है। राहुलनगर मजदूर बस्ती सहित कई गांव में बाढ़ का पानी घुसने से ग्रामीणों को काफी परेशानी हो रही है।
मामले की हकीकत की पड़ताल करते हुए जनता से सीधा संवाद किया गया। लोगों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देकर दर्द और गुस्सा दोनों जाहिर किया।
————-
जनता और जिम्मेदारों की राय
पूरनपुर निवासी रवि यादव –
“जलभराव के लिए सिर्फ प्रशासन जिम्मेदार है। जिले में अवैध प्लॉटिंग हो रही है। तालाब और नाले पाटकर कॉलोनियां काट दी गईं। शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई। कब्जे हटाए जाएं।”
कलीनगर के नदीम खान –
“बरसात से पहले ध्यान न देने की लापरवाही ही वजह है। इसमें प्रशासन और जनता दोनों जिम्मेदार हैं। पहले शिकायत नहीं की गई, अब भुगतना पड़ रहा है।”
भाजपा नेता अशोक राजा –
“मैंने पहले ही मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कलीनगर–पूरनपुर मार्ग, खारजा नहर और जमुनिया पुलिया की समस्या बताई थी। ध्यान न देने से लोग परेशान हैं।”
वरिष्ठ पत्रकार और कवि सतीश मिश्र –
“इसका जिम्मेदार इंद्रदेव हैं। भगवान कृष्ण के समय भी बरसात ने कहर बरपाया था। फर्क इतना है कि तब भगवान ने लोगों की रक्षा की थी।”
सबलू खान –
“समस्या की जड़ बेलगाम भू-माफिया हैं।”
चांदूपुर के प्रशांत पांडेय –
“जनता और प्रशासन दोनों जिम्मेदार हैं। जनता नालियों में कूड़ा डालती है और कब्जा करती है। प्रशासन पानी निकासी की व्यवस्था नहीं करता।”
अनुराग मिश्रा –
“दोनों पक्ष दोषी हैं – जनता और प्रशासन।”
रूपदास –
“ज्यादा जिम्मेदार प्रशासन है। भू-माफियाओं ने तालाब और नाले पाटकर प्लॉटिंग कर दी। पानी को रास्ता चाहिए, लेकिन किसी ने नहीं सोचा।”
आयुष शर्मा –
“सवाल ये है कि जवाबदेही कौन लेगा? तैयारी की बातें तो बहुत हुईं।”
कलीनगर के राजेश माथुर –
“जिम्मेदार हमारी भोली जनता है।”
अरविंद यादव –
“पानी कभी अपना रास्ता नहीं भूलता। लेकिन लोगों ने तालाब और निचली जगहों पर प्लॉटिंग कर मकान बना लिए। यही समस्या की जड़ है।”
सपा नेता अकील खान अजीजी –
“अधिकारियों, नेताओं और भ्रष्टाचार की मिलीभगत जिम्मेदार है।”
जगदीप सिद्धू –
“शहर की जनता 10 दिन जलभराव से जूझती है, लेकिन हमारे लिए यह बड़ी समस्या है। नागरिकों को चापलूसी छोड़ निडर होकर आवाज़ उठानी चाहिए।”
किसान नेता गुरप्रीत सिंह –
“शहर में अवैध कॉलोनियां और नाले-तालाब पटाना मुख्य कारण है। ग्रामीण इलाकों में समय से डैम का पानी न छोड़ना और अचानक ज्यादा पानी छोड़ना बाढ़ लाता है। यह कुदरत नहीं, जल प्रबंधन की लापरवाही है।”
डॉ. ओम बाबू शर्मा –
“सड़कों पर सीढ़ियां बनाकर अतिक्रमण भी बड़ी समस्या है। इसके लिए जिला प्रशासन जिम्मेदार है।”
पूरनपुर के नितिन वर्मा –
“प्रशासन और उनका सिस्टम जिम्मेदार है। बरसात से पहले नालियों की सफाई और कचरा हटाने का काम होना चाहिए था।”
कलीनगर के सचिन पांडेय –
“जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि वादे भूल जाते हैं और प्रशासन भी उदासीन रहता है। मई–जून में हर साल स्वच्छता विशेष अभियान अनिवार्य होना चाहिए।”
आप जिला अध्यक्ष अमित मिश्रा –
“जिम्मेदार सरकार भी है और नागरिक भी। लोग घरों के सामने नालियां चोक होने पर खुद साफ नहीं करते। तालाब पट चुके हैं, अफसर जानते हुए भी चुप हैं।”
जमुनिया के देवेश यादव –
“फिर वही हुआ जो पिछले साल हुआ था। कोई सबक नहीं लिया।”
इब्ने हसन –
“अगर एक साल पहले कलीनगर पुलिया की मरम्मत हो जाती तो आज ये दिन नहीं देखना पड़ता।”
चांदूपुर के शत्रुघ्न पांडेय –
“पीलीभीत में बाढ़ अधिकारियों की कमाई का जरिया बन चुकी है।”
लक्ष्मीपुर के धर्मेंद्र लोधी –
“पूरा सिस्टम भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है।”
✒️Shailendra Sharma Vyast




