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बनबसा बैराज से शारदा नदी में लाखों क्यूसेक पानी रिलीज किये जाने से शारदा नदी उफनाई

हजारा ग्राम तथा शास्त्रीनगर गांव में बाढ़ का पानी घुसा

गांव में लोगों के घरों में घुसा बाढ़ का पानी

हजारा, पीलीभीत। पिछले कई दिनों से पहाड़ों तथा मैदानी इलाकों में हो रही भारी बारिश का असर शारदा नदी के जलस्तर पर दिखाई दे रहा है । क्योंकि हो रही भारी बारिश के कारण बनबसा बैराज से शारदा नदी में लगातार लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से शारदा नदी उफान पर चल रही है। और जिसका नतीजा यह रहा कि ट्रांस शारदा क्षेत्र के अंतर्गत हजारा ग्राम तथा शास्त्रीनगर गांव में लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया। प्राणदायिनी कहे जाने वाली शारदा नदी हजारा ग्राम तथा शास्त्रीनगर के ग्रामीणों लिए एक बार फिर आफत का सबब बन गई है। अभी चार – पांच दिन पहले बाढ़ की मार झेलने के बाद एक बार फिर ग्रामीणों को बाढ़ से जूझना पड़ रहा है। बाढ़ आने से हजारा ग्राम तथा शास्त्रीनगर गांव के हालात बद से बदतर हो गये हैं। क्योंकि पिछले कई दिनों से इन गांवों से बाढ़ का पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है । रविवार की शाम से पानी बढ़ने की आंशका को देखते हुए लोग रात भर अपने मवेशियों व घरेलू सामान के साथ सुरक्षित स्थानों को पलायन करने में लगे रहे थे। वहीं दूसरी ओर लोगों की धान व गन्ने की फसलें बाढ़ के पानी में पूरी तरह से जलमग्न हो गई हैं। इसके अलावा ग्रामीणों को सबसे बड़ी समस्या मवेशियों को लेकर हो रही है। इस समय हजारा ग्राम तथा शास्त्रीनगर गांवों ने टापू का रुप ले लिया है। गांव की सड़कों पर तीन से चार फिट पानी हो गया है। जिससे ग्रामीणों को आने जाने में काफी परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा है।यहां हम आपको बता दें कि ट्रांस शारदा क्षेत्र एक बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। शासन प्रशासन बरसात का सीजन शुरू होने से पहले बाढ़ से निपटने के लिए बड़े-बड़े दावे करता है। लेकिन यह दावे बाढ़ के दौरान सिर्फ और सिर्फ हवा हवाई साबित हुए हैं। क्योंकि हजारा ग्राम तथा शास्त्रीनगर गांवों में आज तक नाव की व्यवस्था नहीं हो पाई है । जो बाढ़ जैसी आपातकालीन स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण साधन होता है। सूत्रों के अनुसार अधिकतर गांवों में नाव की व्यवस्था नहीं है।वहीं ट्रांस शारदा क्षेत्र में सोमवार की सुबह से ही मूसलाधार बारिश हो रही है। जिससे लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। नीचे बाढ़ का पानी तथा ऊपर से आसमानी आफत की मार । जिससे लोगों का जन जीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है। वहीं बाढ़ पीड़ितों ने आरोप लगाते हुए कहा अभी तक हम लोगों का हाल चाल लेने के लिए शासन प्रशासन से कोई भी अधिकारी या राजस्व विभाग का कर्मचारी नहीं आया है। इससे ग्रामीणों में काफी रोष व्याप्त है। वहीं समाचार लिखे जाने तक इंडो नेपाल सीमावर्ती गांवों में भी बाढ़ का पानी बढ़ना शुरू हो गया था।

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