सिद्धनगर-हजारा मार्ग डूबा, कई गांवों का संपर्क टूटा, राहत शिविरों में व्यवस्थाएं नदारद,
डीएम के आदेशों को जमीनी अमले ने किया नजरअंदाज

सिद्धनगर-हजारा मार्ग डूबा, कई गांवों का संपर्क टूटा, राहत शिविरों में व्यवस्थाएं नदारद,
डीएम के आदेशों को जमीनी अमले ने किया नजरअंदाज
पूरनपुर,पीलीभीत।तहसील पूरनपुर के शारदा पार थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले दर्जनों गांव इन दिनों भारी बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के चलते बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। सबसे अधिक खराब हालत हजारा और उससे लगे गांवों की है, जहां सिद्धनगर-हजारा मार्ग सहित तमाम संपर्क मार्ग जलमग्न हो चुके हैं। ग्रामीणों की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई है, लेकिन प्रशासन की नाव और राहत टीम अब तक मौके से नदारद हैं।लगातार हो रही बारिश और नेपाल की ओर से छोड़े गए पानी के कारण शारदा नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर को पार कर चुका है। इसके चलते हजारा,हजारा क्षेत्र के करीब दो दर्जन गांवों में बाढ़ जैसा मंजर बन गया है। खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं, वहीं कई ग्रामीणों के घरों में भी पानी घुस चुका है।प्रशासन ने दावा किया था कि शारदा पार क्षेत्र में बाढ़ से निपटने के लिए राहत शिविर बनाए गए हैं और जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। लेकिन जब जमीनी हकीकत की पड़ताल की गई तो तस्वीर कुछ और ही निकली।जिन गांवों में राहत शिविर खोले जाने थे, वहां न तो कोई सूचना बोर्ड है, न ही कोई ठोस इंतजाम। अधिकांश ग्रामीणों को यह भी नहीं पता कि राहत शिविर कहां हैं।क्या इन केंद्रों में पशुओं के लिए चारा, पीने का पानी, दवाएं और खाद्यान्न की व्यवस्था है।जिलाधिकारी द्वारा बाढ़ से निपटने के लिए पहले ही दिशा-निर्देश जारी किए गए थे, जिसमें नाव, राहत सामग्री, मेडिकल टीमें और पशु चिकित्सा सहायता की व्यवस्था शामिल थी। लेकिन तहसील और थाना स्तर पर तैनात अधिकारी सिर्फ कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रहे।बाढ़ के पानी ने ग्रामीणों का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। बच्चों की पढ़ाई रुकी पड़ी है, महिलाएं पीने के पानी और राशन के लिए दर-दर भटक रही हैं। पशुओं के चारे का कोई इंतजाम नहीं है, जिससे कई मवेशी बीमार हो चुके हैं। बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौती बन गया है।




