शारदा नदी में करोड़ों का बजट डूबा, बाढ़ से ग्रामीण फिर बेहाल
कागजों में बचाव कार्य, हकीकत में डूबे गांव मवेशियों के लिए चारे का संकट

शारदा नदी में करोड़ों का बजट डूबा, बाढ़ से ग्रामीण फिर बेहाल
कागजों में बचाव कार्य, हकीकत में डूबे गांव मवेशियों के लिए चारे का संकट
पूरनपुर,पीलीभीत।शारदा नदी के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी ने हजारा क्षेत्र की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पहाड़ों पर हो रही बारिश के चलते नदी उफान पर है। बाढ़ का पानी तटवर्ती गांवों में घुसने से खेत जलमग्न हो गए हैं। धान और गन्ने की खड़ी फसल पूरी तरह चौपट हो गई है। सड़कें कटकर टूट गईं और कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। ग्रामीण नावों और अस्थायी साधनों से सफर करने को मजबूर हैं।धान और गन्ने की फसल बर्बाद होने से किसानों पर गहरा संकट खड़ा हो गया है। खेतों में खड़ा महीनों की मेहनत का फसल पानी में डूबकर नष्ट हो गया। मवेशियों के लिए चारे का संकट तेजी से गहराता जा रहा है। ग्रामीण अपने पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुट गए हैं। बच्चों और बुजुर्गों के लिए हालात और भी कठिन हो गए हैं। हर साल बाढ़ बचाव और तटबंधों की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपए का बजट आता है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने रहते हैं। न तटबंध मजबूत किए जाते हैं और न ही ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त की जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकार और प्रशासन केवल कागजी खानापूर्ति करता है, जबकि हर साल उनकी जिंदगी और मेहनत पर पानी फिर जाता है।हजारा क्षेत्र के किसान रामलाल ने कहा, “धान की पूरी फसल चौपट हो गई है। अब परिवार के लिए खाने का अनाज भी नहीं बचा।” वहीं भगवती देवी ने बताया, “मवेशियों के लिए चारा नहीं है। बच्चे दूध तक से वंचित हैं।” गांव के राजेश ने कहा रोज़मर्रा का सामान लाना तक मुश्किल हो गया है। अधिकारी सिर्फ सर्वे करने आते हैं, मदद बहुत देर से मिलती है।प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ नियंत्रण विभाग की टीमें सक्रिय कर दी हैं। गांवों में नावें पहुंचाई जा रही हैं और राहत शिविरों की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने ग्रामीणों को सतर्क रहने और खतरे की स्थिति में ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है।
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश की संभावना जताई है।
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निरीक्षण के नाम पर दौड़ाए जा रहे कागजी घोड़े
इस बार भी कलीनगर और पूरनपुर तहसील क्षेत्र में बाढ़ बचाव के लिए आए करोड़ों का बजट ठिकाने लगा दिया गया। बाढ़ बचाव कार्य के नाम पर अफसर केवल दिखावा करते नजर आ रहे हैं। निरीक्षण के नाम पर ट्रैक्टर और पैदल घूम कर वाहा वाही लूट रहे हैं। क्षेत्र की जनता हर साल इस समस्या से जूझती है। बरसात होने से शारदा नदी का जलस्तर और बढ़ने का अंदेशा है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित इलाकों की मुश्किलें और गहरा सकती हैं।
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