शारदा नदी के कटान से जूझ रहा इलाका, क्षेत्र की समस्या पर प्रशासन हुआ गंभीर, ग्रामीणों और प्रधानों से की बात

शारदा नदी के कटान से जूझ रहे हजारा क्षेत्र में प्रशासन हुआ गंभीर, ग्रामीणों और प्रधानों से की बात
पीलीभीत: ट्रांस शारदा क्षेत्र के हजारा-नौतल्ला में शारदा नदी के भीषण कटान और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए मौके का मुआयना किया। अधिकारियों ने कटान से प्रभावित ग्रामीणों का दर्द जाना और उनके साथ मिलकर वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद, क्षेत्र के ग्राम प्रधानों और राजस्व विभाग की टीम के साथ एक संयुक्त बैठक कर बाढ़ और कटान के स्थाई और तात्कालिक समाधान पर गहन चर्चा की।पूर्व थाना हजारा के पश्चिम में शारदा नदी लंबे समय से शांत थी, लेकिन इस साल इसने तेजी से कटान शुरू कर दिया है, जिससे कई ग्रामीणों की जमीनें नदी में समा गई हैं। बाढ़ की स्थिति पैदा होने पर मुख्य मार्ग पर भी जलभराव हो गया, जिससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया।सूचना मिलने पर, बाढ़ खंड और राजस्व विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से 2-3 फीट गहरे पानी को पार करते हुए कटान स्थल का निरीक्षण किया और पीड़ितों को हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
स्थाई समाधान पर मंथन
अधिकारियों ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, जिसमें ग्राम प्रधान भी शामिल थे, के साथ बैठक कर इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान पर विचार-विमर्श किया।ग्राम प्रधान मनोज सिंह (शास्त्रीनगर) ने कहा, “कटान किसी भी परिवार के भविष्य को अंधकार में धकेल देता है। प्रशासन से हमारी मांग है कि एक मजबूत व्यवस्था स्थापित की जाए ताकि ऐसी मुसीबत किसी पर न आए।”ग्राम प्रधान बासुदेव कुंडू (चंदिया हजारा) ने बताया कि बाढ़ खंड के अधिकारियों के अनुसार, इसका एकमात्र स्थाई समाधान नदी के दोनों किनारों पर काम करना है।ग्राम प्रधान मुकेश कुमार (मुरैनियाँ गांधीनगर) ने इस समस्या का कारण नेपाल से छोड़े गए पानी और वहां की सहायक नदियों को बताया और इसकी वैधानिक जांच की मांग की।ग्राम प्रधान इकबाल सिंह उर्फ पाला (कबीरगंज) ने कहा कि सबसे ज्यादा नुकसान किसानों का हो रहा है, इसलिए उन्हें अपनी बात प्रमुखता से प्रशासन के सामने रखनी चाहिए।ग्राम प्रधान शमशेर आलम (भरतपुर) ने प्रशासन द्वारा दिए जा रहे निर्देशों का पालन करने की बात कही और कहा कि स्थिति सामान्य होने पर स्थाई समाधान के लिए शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी पीड़ा रखी जाएगी।प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर फिलहाल अस्थाई तौर पर बांस और बल्लियां लगाकर कटान को रोकने का निर्णय लिया है, ताकि किसी भी तरह के नुकसान को कम किया जा सके। भविष्य में जनहित में जो भी स्थाई समाधान होगा, उसे प्रशासन की मदद से समय पर पूरा किया जाएगा, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।




