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राखियों से सजे बाजार, बहनों ने शुरू की खरीदारी, भाई-बहन के रिश्ते में फिर बंधेगा प्यार का डोर

राखियों से सजे बाजार, बहनों ने शुरू की खरीदारी, भाई-बहन के रिश्ते में फिर बंधेगा प्यार का डोर

अमरिया, पीलीभीत।भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन नजदीक आते ही अमरिया कस्बे में उत्सव जैसा माहौल बन गया है। बाजारों में राखियों की दुकानों की चहल-पहल और रंग-बिरंगी सजावट ने त्योहार की रौनक बढ़ा दी है। बहनों ने अपने भाई के लिए राखियों की खरीदारी शुरू कर दी है, तो वहीं दुकानदारों के चेहरे भी बढ़ी हुई बिक्री से खिले हुए हैं।इस बार बाजारों में पारंपरिक राखियों के साथ-साथ फैशनेबल और थीम आधारित डिजाइनर राखियों की भरमार देखने को मिल रही है। छोटे बच्चों के लिए कार्टून कैरेक्टर वाली राखियां, युवाओं के लिए स्टाइलिश ब्रासलेट राखियां, और बुजुर्गों के लिए सरल-सौम्य राखियों की विशेष रेंज उपलब्ध है। बाजार में स्वदेशी राखियों की मांग भी बढ़ रही है। चीन निर्मित राखियों की जगह अब भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दी जा रही है।स्थानीय दुकानदार बताते हैं कि “इस बार राखियों की कीमत ₹5 से लेकर ₹500 तक है। बच्चों की पॉपुलर राखियां जैसे डोरेमोन, छोटा भीम, स्पाइडरमैन आदि खूब बिक रही हैं। इसके साथ ही कस्टमाइज राखियों की भी मांग है, जिन पर नाम या फोटो छपवाई जा सकती है।त्योहार की तैयारी में मिठाइयों की दुकानों पर भी भीड़ देखी जा रही है। कई परिवारों ने पहले से ही मिठाइयों की बुकिंग कर ली है। साथ ही ऑनलाइन गिफ्टिंग का चलन भी इस बार काफी बढ़ा है। जो बहनें दूर हैं, वे कोरियर या ऑनलाइन माध्यम से राखियां और उपहार भेज रही हैं।हालांकि महंगाई का असर राखी बाजार पर भी पड़ा है। पिछले साल की तुलना में इस बार राखियों की कीमतों में 15-20% तक का इजाफा देखने को मिल रहा है। इसके बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं है। स्थानीय प्रशासन ने भी बाजारों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस टीमों को तैनात किया है और ट्रैफिक को सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए हैं।रक्षाबंधन सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच अटूट प्रेम और सुरक्षा के वचन का पर्व है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके दीर्घायु और सुखद जीवन की कामना करती हैं, और भाई बहनों की रक्षा का वचन देते हैं।जैसे-जैसे रक्षाबंधन का दिन नजदीक आ रहा है, अमरिया का बाजार प्रेम, परंपरा और उत्साह से भरता जा रहा है। राखियों से सजे स्टॉल और बहनों की खुशियों से गुलजार बाजार एक बार फिर इस पावन पर्व की गरिमा को दर्शा रहे हैं।

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