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पंजाब के बटाला में पत्रकार बलबिंदर सिंह की पीटकर हत्या में पीलीभीत के कलमकारों में रोष

पंजाब के बटाला में पत्रकार बलबिंदर सिंह की पीटकर हत्या में पीलीभीत के कलमकारों में रोष

दिल्ली। पंजाब के गुरदासपुर जिले के बटाला शहर में एक पत्रकार की नृशंस हत्या ने पूरे देश की झकझोर कर रख दिया है। मृतक पत्रकार बलबिंदर सिंह, जो एक स्थानीय अखबार और डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े हुए थे। कबरेज के दौरान स्थानीय पुलिस कर्मियों द्वारा बर्बर तरीके से पिटाई के बाद मौत हो गई। पूरा मामला पड़ोस में लगे सीसीटीवी में कैद हो गया। यह घटना ना सिर्फ प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है, बल्कि पंजाब पुलिस के रवैये पर भी गंभीर आरोप खड़े करती है।

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घटना का विवरण

घटना 6 अगस्त की शाम को बटाला शहर के हरिपुरा मोहल्ले में हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पत्रकार बलबिंदर सिंह को कुछ पुलिसकर्मी उनको पीटकर ले गए। गर्दन पर लाते मारी। आरोप है पत्रकार की हत्या एक “सुनियोजित साज़िश” का हिस्सा थी, क्योंकि बलबिंदर सिंह ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया और समाचार चैनल पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भ्रष्ट गतिविधियों को उजागर किया था।

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प्रेस समुदाय में रोष

पंजाब के अलावा पीलीभीत समेत देश भर के पत्रकारों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। पत्रकार संगठनों ने इसे “प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला” करार दिया है। बटाला प्रेस क्लब, पंजाब यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स और कई अन्य मीडिया संगठनों ने संयुक्त बयान जारी कर घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

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पुलिस प्रशासन की प्रतिक्रिया

 

पुलिस अधीक्षक (एसपी) गुरप्रीत सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि घटना की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित कर दी गई है और चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है।

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एसपी का कहना है:

हम इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच करवा रहे हैं। आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। कोई भी दोषी बख्शा नहीं जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार है जिससे मौत के असल कारणों की पुष्टि होगी।”

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राजनीतिक प्रतिक्रिया

घटना के बाद पंजाब की राजनीति में उबाल आ गया है। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।

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मांगें क्या हैं?

बलबिंदर सिंह की हत्या के बाद पत्रकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निम्नलिखित मांगें की हैं:

1. सभी दोषी पुलिसकर्मियों की तुरंत गिरफ्तार

2. मामले की न्यायिक जांच (High Court monitored SIT)

3. पीड़ित परिवार को 1 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी

4. पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करना

5. बटाला एसएचओ और एसपी की तत्काल बर्खास्तगी

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