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कृमि मुक्ति दिवस पर डॉ. रश्मी ने बच्चों को पिलाई रोग नाशक गोलियां

महिला चिकित्सक ने जीता मरीजों का दिल, सेवाभाव बनी मिसाल

कृमि मुक्ति दिवस पर डॉ. रश्मी ने बच्चों को पिलाई रोग नाशक गोलियां
महिला चिकित्सक ने जीता मरीजों का दिल, सेवाभाव बनी मिसाल
पूरनपुर,पीलीभीत।शारदा स्कूल कबीरगंज में सोमवार को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस के अवसर पर विशेष स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया।इस कार्यक्रम के तहत विद्यालय में पढ़ने वाले सभी बच्चों को एल्बेंडाज़ोल टैबलेट खिलाई गई।कार्यक्रम में विशेष रूप से उपस्थित महिला चिकित्सक डॉ. रश्मी ने बच्चों को दवा खिलाई और उन्हें कृमि संक्रमण से बचाव के उपाय बताए। उन्होंने समझाया कि पेट में कीड़े लगने से बच्चों की सेहत पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिससे कुपोषण, एनीमिया, पेट दर्द, कमजोरी और पढ़ाई में ध्यान न लगने जैसी समस्याएं होती हैं। एल्बेंडाज़ोल दवा का सेवन करने से इन रोगों से बचाव होता है और बच्चों की वृद्धि व एकाग्रता में सुधार आता है।विद्यालय के प्रधानाचार्य ने बताया कि यह कार्यक्रम स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों के अंतर्गत आयोजित किया गया है। दवा वितरण के दौरान सभी बच्चों को उनकी उम्र और वजन के अनुसार सही मात्रा में टैबलेट दी गई। विद्यालय स्टाफ ने पूरे कार्यक्रम की निगरानी की।डॉ. रश्मी ने बच्चों को हाथ धोने की आदत, साफ-सफाई का महत्व और संतुलित आहार लेने की सलाह दी। उन्होंने अभिभावकों से भी अपील की कि वे समय-समय पर बच्चों को कृमि नाशक दवा अवश्य दिलवाएं और उनकी व्यक्तिगत स्वच्छता पर ध्यान दें।इस अवसर पर विद्यालय के सभी शिक्षक, छात्र-छात्राएं और अभिभावक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। बच्चों ने उत्साहपूर्वक दवा का सेवन किया और इस पहल का स्वागत किया।वही हजारा के मुरैना पीएचसी मे क्षेत्र में तैनात महिला चिकित्सक रश्मि अपनी लगन, सेवाभाव और मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार के लिए चर्चा का विषय बनी हुई हैं। मरीजों का कहना है कि वह न केवल उपचार में निपुण हैं, बल्कि हर मरीज को परिवार जैसा स्नेह और भरोसा देती हैं।चिकित्सक की त्वरित जांच, सही इलाज और सहज उपलब्धता ने अस्पताल की छवि को भी बेहतर बनाया है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के लिए वह खास सहारा बनी हैं, जहां वे बिना झिझक अपनी समस्याएं साझा कर पाती हैं।स्थानीय लोग और मरीज उनके कार्य की सराहना करते हुए कहते हैं कि अगर हर डॉक्टर ऐसा सेवाभाव अपनाए, तो स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर और भी ऊंचा हो सकता है।

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