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गोमती उद्गम स्थल को पर्यटन घोषित करने के पत्र का पर्यटन मंत्री ने लिया संज्ञान, जिला पंचायत अध्यक्ष की मांग पर विधान परिषद सदस्यों ने सदन में उठाया था मुद्दा

गोमती उद्गम स्थल को पर्यटन घोषित करने के पत्र का पर्यटन मंत्री ने लिया संज्ञान, जिला पंचायत अध्यक्ष की मांग पर विधान परिषद सदस्यों ने सदन में उठाया था मुद्दा

विधान परिषद सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष ने उठाई थी मांग

पीलीभीत। जिला पंचायत अध्यक्ष की मांग पर विधान परिषद के सदस्यों ने गोमती उद्गम स्थल को पर्यटन घोषित कर सौंदर्य करण के लिए विधान परिषद के प्रमुख सचिव को पांच माह पहले पत्र दिया था। मामले को सदन में उठने के बाद पर्यटन मंत्री ने इस पर संज्ञान लिया है। उन्होंने पीलीभीत की मांग को वर्धा सूची में रखा है। इसको लेकर गोमती भक्तों में काफी खुशी देखी जा रही है। अनुमान लगाया जा रहा है शीघ्र गोमती उद्गम स्थल को पर्यटन का दर्जा मिलेगा। पीलीभीत जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ दलजीत कौर और उनके पति वरिष्ठ भाजपा नेता डॉक्टर गुरभाग सिंह ने विधान परिषद के सदस्य डॉक्टर जयपाल सिंह व्यस्त को गोमती उद्गम स्थल को पर्यटन का दर्जा बनाने की मांग का पत्र दिया था। इसके बाद श्री व्यस्त व डॉक्टर रतनपाल सिंह ने 4 मार्च को विधान परिषद के प्रमुख सचिव को गोमती उद्गम स्थल को पर्यटन घोषित कर जीणोद्धार करने का पत्र लिखा है। नियम 110 के अंतर्गत सूचना बताई गई थी। पत्र में बताया गया भारतीय संस्कृति में नदियों को जीवन दायिनी कहा जाता है। धार्मिक पौराणिक ग्रंथों में भी नदियों की महिमा गाई गयी है, मानव सभ्यता का उद्वव और विकास भी नदियों के किनारें ही हुआ है, तथा विशेषताओं के कारण नदियों को जीवन रेखा कहा गया है। पौराणिक धार्मिक ग्रंथों में गंगा मॉ गोमती नदी का उद्गम जनपद पीलीभीत की तहसील कलीनगर क्षेत्र के गांव माधोटांडा के 980 गाटा संख्या से होकर जिसे गोमत सरोवर, गोमत ताल व फुलहर झील भी कहा जाता है। गोमती नदी के उद्गम होने के कारण जनपद- पीलीभीत गोमती नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। पौराणिक, एतिहासिक, धार्मिक, आध्यामिक, सांस्कृतिक एंव नैसर्गिक महत्व के विरासत को संजोय हुए है। जनपद पीलीभीत में लगभग- 47.2 किलोमीटर से उद्रम होकर शाहजहाँपुर की सीमा तक गोमती नदी का बहाव क्षेत्र है। जनपद- भीलीभीत के 16 ग्राम पंचायतों से होकर गोमती नदी गुजराती है। गोमती नदी के उद्रम तीर्थ स्थल माधोटांडा पर प्रति शाम बनारस के तर्ज पर दोनो किनारों पर आरती का आयोजना क्षेत्रीय जनता के द्वारा किया जाता है। जिसमें सैकड़ों श्रद्वालु शामिल होते है। गोमती नदी के उद्गम तीर्थ स्थल पर कार्तिक पूर्णिमा एंव ज्येष्ठ गंगा दशहरा के अवसर पर मॉ गोमती महोत्सव भी आयोजन किया जाता है। जिसमें प्रदेश भर एंव उत्तराखण्ड तथा नेपाल के पर्यटक आते है। इसके साथ ही गोमती उद्गम स्थल से पीलीभीत टाइगर रिजर्व बहुत ही पास में है। जनपद पीलीभीत गोमती नदी के उद्गम के आस- पास बने पार्क की लाइटें, जलस्रोत झूले, एंव जल को स्पर्श करने के लिए बनी सीढ़ियाँ एंव गोमती उद्गम के रास्ते काफी क्षतिग्रस्त तथा टूटे हुये है। जिसका सौंदर्यकरण कराया जाना जनहित में अति आवश्यक है। अतः इस लोक महत्व के सुनिश्चित विषय पर सदन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए जनपद पीलीभीत के इस पौराणिक एंव धार्मिक स्थल कों गोमती नदी के उद्गम धर्म क्षेत्र घोषित कर पर्यटन और आस्था के केन्द्र बिन्दु के रूप में विकसित तथा जल को स्पर्श करने के लिए बनी सीढ़ियाँ, झूले, गोमती उद्गम के टूटे रास्ते, एंव आस- पास बने पार्क की लाइटें, को अविलम्ब ठीक कराकर सदन में वक्तव्य एंव चर्चा कराने की माँग उठाई गई थी। मामला सदन में उठने के बाद पर्यटन मंत्री ने इसपर संज्ञान लिया है। बताया जा रहा है पर्यटन मंत्री ने इसे वरीयता सूची में रखा है। माना जा रहा है शीघ्र गोमती उद्गम स्थल को पर्यटन का दर्जा मिलने से यहां विकास की गंगा बहेगी।क्षेत्रीय लोगों ने विधान परिषद के सदस्यों और जिला पंचायत अध्यक्ष डाक्टर दलजीत कौर व भाजपा नेता गुरभाग सिंह के प्रयास की काफी सराहना की है।


जिला पंचायत अध्यक्ष की मांग पर विधान परिषद के सदस्यों ने गोमती उद्गम स्थल को पर्यटन का दर्जा  दिलाने के लिए सदन में मुद्दा उठाया था। मामले में पर्यटन मंत्री ने संज्ञान में लेकर इसे वरीयता सूची में रखा है। शीघ्र पर्यटन का दर्जा मिलने की उम्मीद है।

डाक्टर गुरभाग सिंह

जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि पीलीभीत

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