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बरेली की सड़कों पर आस्था का सैलाब: उर्स-ए-रज़वी में पहुंचे लाखों जायरीन पंहुचे

बरेली की सड़कों पर आस्था का सैलाब: उर्स-ए-रज़वी में पहुंचे लाखों जायरीन पंहुचे

पीलीभीत,बरेली।107वां उर्स ए रजवी का कुल शरीफ के साथ समापन हो गयी।उर्स-ए-रज़वी के मौके पर लाखों अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ पड़ी, जिससे पूरा शहर इमाम अहमद रजा के रंग में डूब गया है। इस दौरान दरगाह-ए-आला हजरत और जामा मस्जिद के आसपास का क्षेत्र पूरी तरह से भक्तिमय हो गया। शहर की सड़कों पर तिल धरने की जगह नहीं थी, और अकीदतमंदों का सैलाब देखकर ऐसा लग रहा था मानो पूरा शहर इब्ने-रजा की भक्ति में लीन हो गया हो।​यह आयोजन इसलिए भी खास था, क्योंकि यह बरेली दरगाह-ए-आला हजरत के सज्जादानशीन मुफ्ती-ए-आजम हिंद हज़रत मुफ्ती मोहम्मद अख्तर रजा खां अलैहिर्रहमा के सालाना उर्स के मौके पर आयोजित किया गया था। यह आयोजन इस्लामिया मैदान में ‘उम्दा आशिकों का समुद्र’ जैसा दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। दूर-दराज से आए लाखों लोगों ने दरगाह-ए-आला हजरत पर हाजिरी लगाई और उर्स के मौके पर होने वाली धार्मिक सभाओं में भाग लिया।​सड़कों पर दिखी आस्था की अटूट भीड़ ​उर्स-ए-रज़वी के दौरान दरगाह और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र अकीदतमंदों से खचाखच भर गया था। लोगों का सैलाब देखकर ऐसा लग रहा था मानो पूरा शहर एक विशाल जनसभा में बदल गया हो। जामा मस्जिद के बाहर और दरगाह की गलियों में भी लाखों की संख्या में लोग उपस्थित थे।​इस अवसर पर अलग-अलग संगठनों द्वारा ‘दरगाह शरीफ के कुल’, ‘दरगाह-ए-इमामे रजा’, ‘दरगाह-ए-ख्वाजा गरीब नवाज’ जैसे विषयों पर सभाएं आयोजित की गईं, जिनमें इस्लाम के सिद्धांतों और पैगंबर मुहम्मद साहब के संदेशों पर चर्चा की गई।​यह विशाल जमावड़ा एक बार फिर बरेली की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है, जो अपनी शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण परंपराओं के लिए जानी जाती है।इस मौके पर आयोजित सभी कार्यक्रम लोगों को भाईचारे और एकता का संदेश देते हैं।​ इस्लामिया इंटर कॉलेज में हुई एक सभा में दरगाह-ए-आला हजरत के उर्स-ए-रज़वी और इब्ने-रजा के पैगाम पर खास चर्चा हुई। इस सभा में दरगाह-ए-आला हजरत के प्रबंधक मो. नासिर कुरैशी,अहमद खां, और अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया। उन्होंने अहमद-रजा की शिक्षाओं पर जोर दिया और बताया कि कैसे उनके संदेश आज भी प्रासंगिक हैं।​वहीं, इस्लामिया मैदान में आयोजित एक विशाल सभा में ‘उम्दा आशिकों का समुद्र’ शीर्षक से धर्म की चर्चा की गई, जिसमें इमाम अहमद -रजा की जीवनी और शिक्षाओं पर विस्तार से बात हुई। इस दौरान दरगाह शरीफ और आला हजरत के महान व्यक्तित्वों पर भी प्रकाश डाला गया।​यह आयोजन एक बार फिर यह साबित करता है कि बरेली धार्मिक सौहार्द और भाईचारे का गढ़ है, जहां हर साल बड़ी संख्या में लोग एक साथ आकर धर्म का पालन करते हैं।2 बजकर 38, मिनट पर उर्स का समापन हो गया।

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