गन्ने की फसल देखने गया ग्रामीण को बाघ ने बनाया निवाला,गांव में पसरा मातम

गन्ने की फसल देखने गया ग्रामीण को बाघ ने बनाया निवाला,गांव में पसरा मातम
पीलीभीत।जनपद के न्यूरिया थाना क्षेत्र अंतर्गत फुलहर गांव में सोमवार सुबह एक किसान की बाघ के हमले में दर्दनाक मौत हो गई। गांव निवासी 39 वर्षीय दयाराम पुत्र हेमराज रोज की तरह सुबह करीब छह बजे गन्ने की फसल देखने खेत पर गए थे, तभी झाड़ियों में छिपे बाघ ने उन पर अचानक हमला बोल दिया।हमले में बाघ ने उन्हें खेत में काफी दूर तक घसीटा और मौके पर ही मौत के घाट उतार दिया।दयाराम की चीख सुनकर आस-पास खेतों में काम कर रहे ग्रामीण दौड़े,लेकिन जब तक वे मौके पर पहुंचे, तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था। खेत में खून से लथपथ पड़ा शव देख लोग सन्न रह गए। सूचना पर जब परिजन वहां पहुंचे तो रो-रोकर उनका बुरा हाल हो गया। बेटी नंदरानी, जो घटना के समय अपने ससुराल में थी, खबर मिलते ही दौड़ी चली आई और पिता का शव देखकर बेसुध हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया है। वन विभाग के डीएफओ भरत कुमार ने बताया कि प्राथमिक जांच में बाघ के हमले की पुष्टि हो रही है, साथ ही क्षेत्र में कैमरे लगाकर निगरानी तेज कर दी गई है। बाघ की तलाश के लिए विशेष टीम तैनात कर दी गई है। इस घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि बाघ की मौजूदगी की जानकारी वन विभाग को पहले ही कई बार दी जा चुकी थी, लेकिन न तो रेस्क्यू किया गया और न ही सुरक्षा के कोई उपाय किए गए। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते वन विभाग ने कार्रवाई की होती तो दयाराम की जान बच सकती थी। दयाराम अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक विवाहित बेटी छोड़ गए हैं। गांव के लोग उन्हें मेहनती, शांत और मिलनसार किसान के रूप में जानते थे। उनकी मौत से गांव में शोक की लहर फैल गई है। लोग अब खेतों में जाने से डरने लगे हैं। कई किसानों ने तो खेत की ओर रुख करना ही बंद कर दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मृतक के परिवार को शीघ्र उचित मुआवजा दिया जाए,बाघ को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर भेजा जाए और पूरे क्षेत्र में वन्यजीव नियंत्रण के ठोस इंतज़ाम किए जाएं,ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।




